56 हजार आबादी वाले शहर में पुलिस के हिसाब से रहते हैं मात्र 80 किराएदार
रायसेन | 56 हजार की आबादी वाले शहर में 10 हजार 120 परिवार, 9 हजार 854 घरों में निवास करते हैं। इसके बावजूद कोतवाली थाने में मात्र 80 किराएदार की ही जानकारी दर्ज है। अन्य किराएदारों की जानकारी जुटाने में न तो पुलिस की रुचि है न मकान मालिकों की दिलचस्पी। यहीं कारण है कि पुलिस को यह भी पता नहीं है कि कौन-कौन लोग कहां से आकर शहर में किराएदार के रूप में रह रहे हैं। यह बात तब और भी गंभीर हो जाती है जब हाल ही में जिले का दुनिया के खतरनाक आतंकी संगठन आईएसआईएस से कनेक्शन पाया जा चुका है।
भोपाल से एनआईए द्वारा गिरफ्तार आईएस का संदिग्ध एजेंट अजहर इकबाल रायसेन के बरखेड़ा गांव का रहने वाला है। संवेदनशील माने जाने वाले इस जिले में पुलिस इसके बावजूद बड़ी लापरवाही बरत रही हैं। पूरे देश मे आईएस के एजेंटों को लेकर जांच पड़ताल चल रही हैं। आईएस विचार धारा से प्रभावित युवा, गुमराह होकर संगठन से जुड़ने लगते हैं। इसके बाद तो पुलिस ने अंजान और संदिग्ध लोगों की जानकारी के लिए मुहिम तक नहीं चलाई है। हालात यह है कि घरेलू कामकाजी लोग हों या किराएदार उनकी पूरी जानकारी ही पुलिस के पास नहीं है। नियमों के तहत इनकी पूरी जानकारी पुलिस के पास होना चाहिए। इससे किसी घटना के समय संबंधित को पकड़ने में आसानी हो सके । पुलिस इस इंतजार में बैठी है कि लोग स्वयं आगे आकर उनके पास किराएदारों की जानकारी दर्ज कराएंगे। लेकिन ऐसा हो नहीं पा रहा है।
किराएदार की जानकारी नहीं देने पर
हो सकती है कार्रवाई
नियमों के मुताबिक हर उस व्यक्ति को किराएदार के बारे में पुलिस को जानकारी देना आवश्यक है जिनके मकान में किराएदार रहते हैं। ऐसा नहीं करने वालों पर पुलिस सामान्य तौर तो कोई कार्रवाई नहीं करती। हालांकि इसके लिए सीआरपीसी के धारा 188 के तहत कार्रवाई का प्रावधान है।
रहता है खतरा
बाहर से आकर अपराधी किसी के मकान मेंं किराए से रहने लगते है अौर मौका मिलते ही घटना को अंजाम देकर फरार हो जाते हैं । ऐसी स्थिति में बिना किसी जानकारी के अपराधियों तक पहुंचने में पुलिस को भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ सकता हैं । घरेलू नौकरों के मामले में भी इसी तरह की स्थिति बनती हैं । लोग उनके घरों में काम करने वाले नौकरों के बारे में एक तो स्वयं कम जानकारी रखते हैं तो वहीं दूसरी ओर उनके बारे में पुलिस को कोई जानकारी नहीं दी जाती। इससे संवेदनशील जिले में बढ़ी चूक होने की संभावना बनी रहती है।
पुलिस करती है वेरीफिकेशन
किराएदार की जानकारी मिलने के बाद पुलिस उसका वेरिफिकेशन कराती हैं । इसके लिए एक निर्धारित प्रारूप वाला फार्म भरकर जमा कराना होता है । वहीं किराएदार के फोटो और पहचान संबंधी आवश्यक दस्तावेज लिए जाते हैं । इसके अलावा शहर में रहने के कारणों की जानकारी भी ली जाती हैं । किराएदारों के अलावा सामाजिक, व्यवसायिक और धार्मिक कार्यों के लिए बाहर से आने वाले लोगों को भी पुलिस के पास अपनी जानकारी दर्ज कराना चाहिए।
लापरवाही नहीं है लोगों का सहयोग नहीं मिल पा रहा है।
किराएदारों की जानकारी जुटाने के लिए क्या किया जाएगा।
वार्ड-वार्ड जनसंवाद किया जा रहा है, उसमें लोगों से अपील की जा रही है कि वे पुलिस को किराएदारों की जानकारी दें।
एसपी दीपक वर्मा से बातचीत
क्या जिला संवेदनशील है।
जिले को संवेदनशील माना जाता है
थानों में किराएदारों की जानकारी नहीं हैं।
लोगों को आगे आकर अपने मकानों में रहने वाले किराएदारों को जानकारी देना चाहिए।
संवेदनशील जिले में इतनी लापरवाही क्यों।