मैरिज गार्डन न टैक्स भरते, न ही नियमों का कर रहे पालन
गार्डन के बाहर नहीं है पार्किंग व्यवस्था
मैरिज हाल व गार्डन निर्माण की अनुमति के समय नपा को मौके का मुआयना करना चाहिए, लेकिन मौके पर पहुंचने वाले अधिकारियों को पार्किंग, ड्रेनेज, हॉल, सड़क आदि की जगह व्यवस्थित तौर पर बनाने की जानकारी दी जाती है, लेकिन जब यह बनकर तैयार होते है, तब यह सारी सुविधाएं गायब हो जाती है। शहर में बने मैरिज गार्डनों में शासन के मापदंड के तहत 35 फीसदी जगह पार्किंग के लिए नहीं रखी गई है। पार्किंग के अभाव में शादियों में गार्डन के बाहर सड़कों पर वाहनों की पार्किंग होती है। इससे शादी या अन्य कार्यक्रमों के दौरान वहां पर जाम की स्थिति निर्मित होती है। इस समय शादियों का सीजन चल रहा है, जिससे रोजाना यहां पर कोई न काेई बारात लग रही है।
सुविधाओं की
गाइड लाइन
4000 वर्गमीटर होना चाहिए न्यूनतम क्षेत्रफल
400 मीटर होना चाहिए गार्डन का फ्रंट
18 मीटर न्यूनतम चौड़ी सड़क होना चाहिए
35 प्रतिशत हिस्सा पार्किंग के लिए छोड़ना जरूरी है
नहीं हो नियमों का पालन
शहर में संचालित होने वाले अधिकांश मैरिज गार्डनों में शासन के नियमों का पालन नहीं हो रहा है। न तो यहां पर पार्किंग की व्यवस्था है और न ही शासन द्वारा निर्धारित मापदंडों का पालन हो रहा है। गार्डन के सामने पार्किंग की व्यवस्था नहीं होने से शादी समारोह के दौरान जाम की स्थिति बनती है, जिससे लोगों को घंटों जाम में फंस कर परेशान होना पड़ता है। वहीं शादियों के बाद जूठन व अन्य सामग्री को सड़क किनारे ही फेंक दी जाती है, जिसके सड़ने से आसपास क्षेत्र का वातावरण भी प्रदूषित हो रहा है। इसकी शिकायत भी शहर के लोग कई बार प्रशासनिक अधिकारियों से कर चुके हैं।
भास्कर संवाददाता| रायसेन
शहर में संचालित हो रहे मैरिज गार्डनों का उनके संचालकों ने पंजीयन तक नहीं कराया। इससे शासन को मनोरंजन, आमोद व विज्ञापन कर के रूप में राजस्व का नुकसान हो रहा है। इस संबंध में वाणिज्य कर विभाग ने गार्डन संचालकों को नोटिस जारी किए हैं। इसके साथ ही उन्हें अब तक का टैक्स भरने के निर्देश भी दिए गए हैं। जिला वाणिज्य कर अधिकारी जीवन एस रजक ने बताया कि शहर में संचालित हो रहे गौरव गार्डन, राम अयोध्या गार्डन, रायल गार्डन, मिलन गार्डन, शगुन गार्डन और यशवंत गार्डन सहित अन्य गार्डन के संचालकों ने विभाग से अब तक पंजीयन नहीं कराया है।
इससे शासन को टैक्स के रूप में राजस्व की हानि हो रही है। इन गार्डन संचालकों को नोटिस देकर पंजीयन कराने और टैक्स की राशि जमा करने के निर्देश दिए गए है। एक समय सीमा में यह गार्डन संचालक पंजीयन नहीं कराते और टैक्स की राशि जमा नहीं करते हैं, तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
नेशनल हाईवे पर बने गार्डन के बाहर नहीं है पार्किंग की व्यवस्था।
जिले के सभी प्रमुख नगरों में मैरिज गार्डन संचालित किए जा रहे हैं। रायसेन शहर में 8 मैरिज गार्डन संचालित हो रहे हैं। इनमें से 6 तो नेशनल हाईवे के बिल्कुल किनारे पर स्थित हैं। इसी तरह बरेली में 10 और बेगमगंज में आधा दर्जन मैरिज हाल हैं। साथ ही अन्य नगरों और कस्बों में भी मैरिज गार्डन संचालित हैं।
जिले में इतने हैं मैरिज गार्डन