तहसील और बैंक के बीच फंसा मुआवजा
दीवार पर लगी सूचियों में बहुत सारे किसान अपने नाम ढूंढ़ रहे हैं। जिनका नाम मिल जाता वे खुश हो जाते हैं जिनका नाम नहीं मिलता वे निराश हो जाते। यह नजारे बुधवार को तहसील कार्यालय में देखने को मिले। यहां बढ़ी संख्या में किसान आए हुए थे।
डाबर, गिरवर, वरुखार, मिर्जापुर, डाबरा इमलिया, धोबीखेड़ी, धनियाखेड़ी, सिरसोदा, अनरेरी बेरखेड़ी, तेजालपुर,पठारी, मुरेलखुर्द गांव के किसानों ने बताया की वे दो महीने बाद भी खरीफ फसल का मुआवजा न मिलने के कारण भटक रहे हैं। तहसील आते हैं तो बताया जाता है कि बैंक में राशि भेज दी है, बैंक जाते हैं तो वहां कहा जाता है कि राशि अभी आई नहीं है। किसानों की मानें तो वे दो माह से चक्कर काट रहे हैं तहसीलदार ,एसडीएम से लेकर कलेक्टर को भी जनसुनवाई में मुआवजा राशि न मिलने की बात कह चुके हैं। लेकिन परेशानी ज्यों की त्यों हैं। अब परेशान किसान कहते हैं की करें तो क्या करें। सोयाबीन की फसल खराब होने से आर्थिक परेशानी से जूझ रहे हैं। सरकार ने जिले काे राहत राशि उपलब्ध करा दी हैं ,लेकिन प्रशासन के लचर कार्यप्रणाली के कारण सभी किसानों तक राहत राशि नहीं पहुंच पाई हैं । वहीं इमलिया गांव के किसान नंदराम अहिरवार का कहना है कि उसकी राशि गलत किसी दूसरे किसान के खाते में डाल दी गई है।
राहत राशि न मिल पाने के ये हैं कारण
तहसीलदार अविनीश मिश्रा के मुताबिक ट्रेजरी से किए गए 200 ई-पेमेंट फेल हो गए थे । इनमें से किसी किसान का खाता नंबर गलत था तो किसी का आईएफएस कोड सही दर्ज नहीं था । इसलिए ऐसी स्थिति बनी हैं । इनमें से 172 किसानों के मामले सुलझा लिए गए हैं । कुछ ही किसानों को राहत राशि का भुगतान किया जाना हैं ।
नहीं पहुंचा पैसा
मुआवजा राशि नहीं मिली हैं। समितियों में कहा जा रहा है की वहां पैसा ही नहीं पहुंचा। इसलिए पैसा नहीं मिल पा रहा है। -अमित वेदी, पठारी
कलेक्टर को भी बता चुके
सोयाबीन की फसल खराब होने पर राहत राशि नहीं मिली हैं। जबकि प्रशासन पूरी राशि वितरित करने की बात कह रहा हैं। जनसुनवाई में कलेक्टर को बता चुके हैं। इसके बाद भी राशि नहीं मिल पाई। -भारतसिंह, मुरेल खुर्द
आर्थिक संकट
सोयाबीन की फसल खराब होने के बाद आर्थिक रूप से किसानों की कमर टूट गई हैं। पैसे उधार लेकर रबी की बोवनी की है। राहत राशि मिल जाती तो कुछ राहत मिल जाती। -गोविंद वेदी, पठारी
3 माह से चक्कर काट रहे
तीन माह से तहसील और बैंक के चक्कर काट रहा हूं। इस बीच कई आवेदन दिए लेकिन कोई नतीजा नहीं निकल पाया। अभी भी राहत राशि नहीं मिल पाई है। -जोहर मिया, कानपुरा
तहसील परिसर में लगी मुआवजे के सूची में अपना नाम देखते किसान।