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न लैपटॉप मिले और न हाईटेक हो सके पटवारी, अब भी ढो रहे बस्तों का बोझ

4 वर्ष पहले
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प्रदेश सरकार द्वारा किसान हितैशी गिरदावरी एप और फसल कटाई प्रयोग एप योजना लागू की गई है, लेकिन इसको लेकर पटवारियों को व्यवहारिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इसके चलते उन्होंने इस पर कड़ा विरोध जताया है। इसकी एक मुख्य वजह पटवारियों को हाइटेक करने पूर्व में बनाई गई ई-बस्ता योजना पर अमल न कराना है। सरकार की वादा खिलाफी से पटवारियों ने गिरदावरी एप पर एतराज जताना शुरु कर दिया है। जिससे सरकार की यह महत्वाकांक्षी योजना खटाई मे पड़ती दिख रही है।

मालूम है कि सरकार द्वारा इन दिनों डिजिटल इंडिया अभियान चलाया जा रहा है। इसके अंतर्गत सभी शासकीय कामकाज को ऑनलाइन किया जा रहा है। ताकि आमजन को घर बैठे ही सरकारी योजनाओं की सुविधा का लाभ मिल सके। ऐसी ही एक योजना ई.बस्ता है। इसके जरिए पटवारियों को हाइटेक कर किसानों को सुविधा दी जानी थी। इसके तहत तहसील के 70 हल्कों के 22 पटवारियों को लैपटॉप देकर हाईटेक किया जाना था, लेकिन पांच साल बाद भी योजना को मूर्तरुप नहीं दिया जा सका। इसके अमल मे आने से किसानों को सुविधा मिलने के साथ ही साथ राजस्व के सुस्त कार्यों को रफ्तार भी मिलती। लेकिन अफसरों की अनदेखी के चलते ऐसा हो न सका। पटवारियों को अब भी हाइटेक होने लैपटॉप मिलने का इंतजार है, मगर उनकी यह मंशा जल्द पूरी होती नजर नहीं आ रही है।

बस्ते के बोझ से नहीं मिली निजात
शासन की इस घोषणा के बाद शुरुआती दौर में तेजी से काम हुआ। राजस्व विभाग के कामकाज को पूरी तरह ऑनलाइन कर दिया गया। किसानों को भी खसरे खतौनी की नकल देने ऑनलाइन सुविधा शुरु की गई। यह सब होते देख पटवारियों ने भी इस उम्मीद के साथ कंप्यूटर आपरेट करना सीख लिया लेकिन लैपटॉप न मिलने से उन्हें अब भी बस्ते के बोझ से छुटकारा. नहीं मिल पाया।

ये शासन स्तर का मामला है
पटवारियों के ज्ञापन को शासन को फॉर्वर्ड कर दिया गया है। इस पर शासन ही निर्णय लेगा। गिरदावरी का काम तो समय सीमा में करने का है। अभी उनसे काम करने को कहा है। भावना वालिंबे, कलेक्टर रायसेन

गिरदावरी एप को व्यावहारिक बनाने की मांग
पुराना वादा पूरा न करने और अब फसल का सर्वे गिरदावरी एप से करने के निर्देश से पटवारी भड़क गए हैं। पटवारी संघ के जिला अध्यक्ष केशव प्रसाद दुबे ने बताया कि गिरदावरी एप को लेकर पटवारियों को व्यावहारिक कठिनाइयां आ रही हैं। इसे व्यावहारिक बनाया जाना चाहिए। कई किसानों के पास मोबाइल नहीं है तो कुछ पटवारियों के पास स्मार्ट फोन नहीं है। इसको लेकर काफी कठिनाइयां आ रही हैं। एक पटवारी के पास करीब 2 हजार किसानों का काम होता है। ऐसे में वे कहां से इंटरनेट खर्च उठाएंगे। इसके अलावा सरकार ने टेबलेट देने की बात कही थी लेकिन दिया नहीं गया। नेट बैलेंस, भत्ता नहीं दिया जा रहा, काम बहुत बढ़ जाएगा। उनकी मांग है कि पटवारियों को टेबलेट, भत्ता और नेट बैलेंस दिलाया जाना चाहिए। इस नए फरमान का तीखा विरोध करने की तैयारी कर रहे हैं। अपनी इस मंशा से पटवारियों ने बीते दिनों कलेक्टर को ज्ञापन सौंप कर अवगत भी करा दिया है। अब निर्णय शासन को करना है।

सरकार की महत्वकांक्षी योजना पड़ी खटाई में
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