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शहर में स्कूली बच्चों को बैठाकर तेज रफ्तार से चलाए जाते हैं ऑटो

5 वर्ष पहले
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शहर में स्कूली ऑटो चलाने वाले चालकों को बच्चों की जान की परवाह ही नहीं हैं। वे आॅटो में बड़ी ही लापरवाही से बच्चोें को बैठाकर तेज रफ्तार से शहर की भीड़ वाली सड़कों से गुजरते हैं। उन्हें देखकर लोग भी सकते में आ जाते हैं। गुरुवार को नेशनल हाईवे स्थित सेंट थामस स्कूल की छुट्‌टी होने के बाद बड़ी संख्या में स्कूली बच्चे बाहर निकले। उसके बाद ऑटो चालकों ने उन्हें बड़ी संख्या में ऑटो में भरना शुरु कर दिया। ऑटो में पीछे की तरफ बैठे बच्चे अपने पैर लटकाए हुए थे और ऑटो तेज रफ्तार से दौड़ रहे थे।

ऐसे दृश्य शहर में रोजाना ही आम हैं। इससे हमेशा ही दुर्घटना का अंदेशा बना रहता है। एक बार ऑटो से बच्चा गिरने की घटना हो भी चुकी है। जागरुक नागरिकों ने उस बच्चे को जल्द ही उठा लिया था । इस तरह के हाल शहर के आधा दर्जन स्कूलों के हैं जहां के बच्चे ऑटो में स्कूल और घर के बीच का सफर असुरक्षित ढंग से तय करते हैं ।

परिवहन विभाग का है काम: जिला शिक्षा अधिकारी एसपी त्रिपाठी के मुताबिक ऑटो में अधिक स्कूली बच्चे बैठाने का मामला परिवहन विभाग का है । इसमें हम कुछ नहीं कर सकते। इसके लिए दो माह पहले परिवहन विभाग द्वारा बैठक भी ली गई थी। उस बैठक में ऑटो चालकों को निर्देश दिए गए थे।

लगता है डर
बच्चों को ऑटो से स्कूल भेजना मजबूरी हैं लेकिन जब तक बच्चे स्कूल से घर नहीं आ जाते तब तक डर लगा रहता हैं । करें तो क्या करें । कीर्ति नामदेव पालक रायसेन

देते हैं समझाइश
स्कूल बसों से गाइड लाइन का पालन कराया जाता हैं । इसके अलावा ऑटो वालों को भी समय-समय पर समझाइश दी जाती हैं । रंजना भदौरिया डीटीओ रायसेन

इस तरह आटो में लटक कर घर ले जाए जाते हैं स्कूल से बच्चे।

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