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बौद्धिक कार्यक्रमों से ही होता है बच्चों का विकास
शारीरिककार्यक्रम के साथ बौद्धिक कार्यक्रम से ही बच्चों का सर्वांगीण विकास होता है। हारने वाले व्यक्ति को ही जीतने वाले का श्रेय प्राप्त होता है। यह बात शुक्रवार को सरस्वती शिशु मंदिर विद्यालय में चल रही दो दिवसीय जिला स्तरीय बौद्धिक प्रतियोगिता के समापन अवसर पर स्कूल के जिला समन्वयक गुरुचंद गौड़ ने कहीं।
प्रतियोगिता में जिले के 13 स्कूलों के 384 छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। इस दौरान करीब 20 प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। इसमें राजगढ़, खिलचीपुर, माचलपुर, जीरापुर, छापीहेड़ा, तलेन, पचोर, ब्यावरा, खुजनेर, सुठालिया, कुरावर आदि जगहों के स्कूलों के विद्यार्थियों ने भाग लिया। इस मौके पर जयहिंद दुबे, आनंद जोशी, अतुल जोशी, अर्पिता जैन, स्वदीप सोलंकी, प्रकाश तिवारी, हरीश सोलंकी, गोविंद राठौर, प्रमोद शर्मा आदि मौजूद रहे।
यहहुईं प्रतियोगिता
इसमौके पर प्रश्न मंच, शास्त्रीय संगीत, रासलीला, गायन, एकल अभियान, अंताक्षरी, रंगोली तात्कालिक भाषण, विज्ञान मंडल, तबला वादन, निबंध, काव्य-पाठ, गीता पाठ आदि प्रतियोगिताएं की गईं। इसमें सर्वाधिक इनाम छापीहेड़ा स्कूल को मिले। चित्र कला में सुमित गौड़ सारंगपुर, शास्त्रीय संगीत में शीतल गुप्ता छापीहेड़ा आदि को पुरस्कार दिए गए।