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प्राचीन धरोहरों का नहीं है कोई रखवाला, अधिकारी भी गायब

6 वर्ष पहले
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जिलामुख्यालय स्थित पुरातत्व विभाग का जिला संग्रहालय अनदेखी के चलते बदहाल स्थिति में पहुंचता जा रहा है। प्रचार-प्रसार नहीं होने से सैलानी यहां नहीं पहुंच पा रहे हैं। इससे विभाग को सैलानियों से होने वाली आय का नुकसान उठाना पड़ रहा है। वहीं संबंधित अधिकारी के मनमाफिक हर माह लंबे छुट्टी पर रहने से यहां आने वाले लोगों को प्राचीन प्रतिमाओं से संबंधित जानकारी नहीं मिल पाती।

लाखोंखर्च कर संचालित किया जा रहा संग्रहालय

पुरातत्वविभाग ने लाखों रुपए खर्च कर जिला मुख्यालय पर संग्रहालय स्थापित किया है। इसके पुराने भवन के पास ही लाखों रुपए खर्च कर दो मंजिला इमारत बनवाई गई है। इसमें 51 लाख रुपए की लागत से 2 माह पहले ही दूसरी मंजिल बनाकर गैलरी बनाई है। इसमें कई प्राचीन प्रतिमाएं उनसे संबंधित जानकारी के साथ स्थापित की गई हैं।

संग्रहालयपर अक्सर नहीं मिलते प्रभारी

संग्रहालयप्रभारी मुख्यालय से हर कभी गायब रहते हैं। इससे बाहर से आने वाले सैलानियों को बेहद परेशानी उठाना पड़ती है। इसकी लगातार मिल रही शिकायत को लेकर भास्कर ने सोमवार को संग्रहालय का जायजा लिया। जहां वे नहीं मिले। इस दौरान कुछ लोग संग्रहालय प्राचीन प्रतिमाएं देखने पहुंचे, मगर जानकारी देने वाला जिम्मेदार अधिकारी नहीं मिलने से वह वापस लौट गए।

प्रचार नहीं, इसलिए नहीं पहुंचते सैलानी

जिलासंग्रहालय जयपुर- जबलपुर नेशनल हाईवे पर स्थित जिला मुख्यालय पर बीच शहर में है। मगर इसका प्रचार- प्रसार नहीं होने से लोगों को इसकी जानकारी नहीं है। और ही जिलेभर में कहीं भी इस संबंध में होर्डिंग्स लगाए गए हैं ही स्वागत द्वार या संकेतक लगाकर कोई जानकारी प्रदर्शित की गई है। इस कारण कोटा शहर की ओर आने- जाने वाले प्रादेशिक अथवा विदेशी सैलानियों के वाहन सीधे राजधानी भोपाल, सांची, मांडू, पचमड़ी, भीमबैठका आदि दार्शनिक स्थलों के लिए निकल जाते हैं।

प्राप्त हो सकती है बढ़ी आय

यदिजिला संग्रहालय सहित जिले के विभिन्न दार्शनिक स्थलों का प्रचार-प्रसार किया जाए तो पुरातत्व विभाग को सैलानियों के माध्यम से बढ़ी आय प्राप्त हो सकती है। जयपुर-जबलपुर रोड पर जिले से अक्सर टूरिस्ट वाहनों का काफिला निकलता है, जो जानकारी के अभाव में सीधे निकल जाते हैं। एक वाहन में ही 40- 50 लोग होते हैं। यह ऐसे सैलानी संग्रहालय देखते हुए जाएं तो हर साल विभाग को बढ़ी आय प्राप्त हो सकती है। इसमें एक सैलानी की दो से तीन सौ रुपए की रसीद कटती है।

हजारों साल पुरानी प्रतिमाएं हैं संग्रहालय में

पुरातत्वविभाग के संग्रहालय में हजारों साल पुरानी प्राचीन विभिन्न देवी- देवताओं की प्रतिमाओं के साथ अन्य प्राचीन संस्कृति की कहानी बयां करती प्रतिमाएं स्थापित हैं। यहां आठवीं, दसवीं ग्यारहवीं शताब्दी की प्राचीन प्रतिमाएं रखी गई हैं। इसमें अधिकतर शिव एवं शाक्त, वैष्णव एवं जैन प्रतिमाएं शामिल हैं। वैष्णव प्रतिमा के तहत सूर्य, ब्रह्माजी, हरिहर, गणेश, विष्णु आदि प्रतिमाएं शामिल हैं। वहीं जैन प्रतिमाओं के तहत भगवान पार्श्वनाथ, तीर्थंकर, यक्ष एवं यक्षिणी आदि की प्राचीन प्रतिमाएं हैं। जिन्हें स्थानीय लोगों अथवा सैलानियों में प्राचीन संस्कृति का ज्ञान बढ़ाने रखी गई हैं। वहीं यह प्रतिमाएं रिसर्च करने वाले लोगों के लिए भी सहायक होती हैं।

जिला पुरातत्व एवं संग्रहालय राजग।

त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के चलते कलेक्टर ने आचार संहिता खत्म होने तक जिले के सभी अधिकारी कर्मचारियों के अवकाश प्रतिबंधित किए हैं। आदेश के तहत कोई भी मुख्यालय से बाहर नहीं जा सकता। यदि कि आवश्यक कार्य से जाना भी पड़े तो इसके लिए वह वरिष्ठ अधिकारियों की जानकारी में देकर स्वीकृति प्राप्त करने के बाद ही जा सकेगा। संग्रहालय प्रभारी जीपी सिंह चौहान 6 फरवरी की सुबह से बिना कोई सूचना के मुख्यालय से बाहर हैं। भास्कर टीम संग्रहालय पहुंची तो वहां मात्र एक कर्मचारी मिला। जब श्री चौहान के बारे में पूछा गया तो उनके छुट्टी पर जाने की बात कही। उपस्थिति रजिस्टर में भी 7 फरवरी से हस्ताक्षर नहीं है और ही अवकाश की एप्लीकेशन मिली। जबकि श्री चौहान की तीसरे चरण के पंचायत चुनाव कराने नरसिंहगढ़ ब्लाक में चुनावी ड्यूटी लगाई गई है। इसके आदेश सोमवार को उनके दफ्तर पहुंच गया है। आदेश के तहत उन्हें 12 फरवरी को प्रशिक्षण में शामिल होना है। इसके बाद 22 फरवरी को चुनाव कराने एक दिन पहले संबंधित ड्यूटी कार्यालय में जाना है।

कारण का पता करेंगे

^पंचायतचुनाव के चलते कोई भी अधिकारी अथवा कर्मचारी बिना कलेक्टर की स्वीकृति के मुख्यालय नहीं छोड़ सकता। जिला संग्रहालय प्रभारी चौहान ने छुट्टी नहीं ली है। यदि चुनाव में ड्यूटी लगने के बाद भी मुख्यालय से बाहर गए हैं, तो दिखवाया जाएगा और ड्यूटी पर नहीं पहुंचे तो कार्रवाई की जाएगी। वहीं संग्रहालय के प्रचार- प्रसार संबंधी कार्य के लिए निर्देशित किया जाएगा। आनंदकुमार शर्मा, कलेक्टर राजगढ़