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घटते लिंगानुपात पर कार्यशाला में जताई चिंता

7 वर्ष पहले
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सोनोग्राफी के चलन में आने से घटा लिंगानुपात

कार्यशालामें सीएमएचओ श्री दीक्षित ने बताया कि 1901 में एक हजार पुरुषों पर 972 महिलाएं थीं। जो 1941 में 945 पर जा पहुंची। इसी बीच 1981 में सोनोग्राफी मशीन प्रचलन में आई। इस कारण 1991 में 935, 2001 में 933 और 2011 में 914 पर लिंगानुपात पहुंच गया। जो समाज के लिए घातक है। यह घटता आंकड़ा गर्भावस्था में शिशु के साथ छेड़छाड़ होना दर्शाता है। इसे रोकने के लिए पीसी पीएनडीटी और एमपीटी एक्ट बना लेकिन लोग इससे भी बच निकलते हैं।

राजगढ़ में बढ़ा लिंगानुपात, लेकिन फिर भी घातक

जिलेमें लिंगानुपात के आंकड़े हर जनगणना में बढ़े हैं। लेकिन जो वर्तमान में आंकड़े हैं वे भी समाज में लिंगानुपात समानता बनाएं रखने के लिए ठीक नहीं हैं। जिले में 1991 में 931, 2001 में 938 और 2011 में 955 लिंगानुपात रहा लेकिन यह लिंगानुपात प्रति एक हजार पुरुषों पर एक हजार पांच महिला से काफी कम है।

मानव अधिकार आयोग दिवस पर भ्रूण हत्या एक अभिशाप विषय पर आयोजित कार्यशाला मेंे भाग लेने आए अतिथि।

कार्यालय संवाददाता|राजगढ़

विज्ञानकी दृष्टि से प्रति एक हजार बालकों पर एक हजार पांच बच्चियों को जन्म लेना चाहिए। बालकों की अपेक्षा बालिकाओं में रोग प्रतिरोधक क्षमता ज्यादा होती है, फिर भी लिंगानुपात घट रहा है। यह बात सीएमएचओ एके दीक्षित ने मानव अधिकार आयोग के स्थापना दिवस पर आयोजित कार्यशाला में कही।

सुबह 11 बजे से भ्रूण हत्या एक अभिशाप विषय पर आयोजित इस कार्यशाला में उपस्थित लोगों ने अपने विचार रखे। इस मौके पर विशेष विचारों को आयोग मित्रों ने पंजीकृत कर आयोग को भेजने का निर्णय लिया। कार्यशाला में सीएमएचओ श्री दीक्षित ने 1901 से लेकर आज तक के लिंगानुपात आंकड़ों पर जोर दिया। कलेक्टर आनंद शर्मा ने घटते लिंगानुपात और भ्रूण हत्या पर गंभीरता जताते हुए हर संभव प्रयास करने की बात कही। कार्यशाला में केके कुरैशी नाजां ने लोक जागृति गीत प्रस्तुत किया। राधारमण त्रिपाठी ने भ्रूण हत्या पर काव्यपाठ कर लोगों को प्रेरित किया।

इसके साथ ही सेवानिवृत जज कान्हा मल ने कानून का सशक्त बनाने की पैरवी की। इस मौके पर आयोग मित्र यूएस लाखनोद, आरसी शर्मा, डॉक्टर इरफान खान, केके नागर, डाक्टर वासंती मोघे सहित दर्जनों लोक उपस्थित थे।