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ऊर्जा का सही उपयोग होना जरूरी : मोरारी बापू
संतमोरारी बापू ने कहा कि काम की आलोचना नहीं की जा सकती है। क्योंकि उसके आगे सही रास्ते पर चलकर ही तो मोझ है। ठोकरों के मारे पत्थर भी शिल्प कला के जीवंत हो उठते हैं। वह भी बोलता है जैसे बोलते चित्र होते हैं। बापू ने श्रद्धालुओं को हिदायत देते हुए कहा कि परमात्मा की दी ऊर्जा का उपयोग ठीक से किया जाए। बुद्धि सब में हैं पर आवश्यकता है बुद्धि निर्मल करने की। भगवान राम, शिव, बुद्ध, अल्लाह, जीएस, नानक यह सब एेसे नाम हैं। जिन्होंने अपनी ऊर्जा का सदुपयोग करके जनकल्याण का मार्ग प्रसस्त किया।
पर्यटन नगरी में चल रही श्री राम कथा में रविवार को भारी तादात में श्रद्धालु उमड़े। खजुराहो के फेस्टिवल ग्राउंड में संत मोरारी बापू के मुख से संगीतमयी कथा सुनकर श्रद्धालु कई बार झूम उठे। सुबह 9 बजे से बापू के प्रवचन शुरू हुए दोपहर 12 बजे पवित्र रामायण जी की आरती के साथ कथा का समापन किया गया। कथा में बापू ने खजुराहो में कामदेव दर्शन पर प्रकाश डारकर वास्तविक दर्शन की व्याख्या की। इसमें उन्होंने प्राकृतिक प्रेम के साथ उमड़े काम दर्शन को मानस से जोड़ा।
भंडारामें भी उमड़े श्रद्धालु
कथासुनने के लिए खजुराहो के साथ आस-आस के गांवों और नगरों से भी बड़ी संख्या में शद्धालु पहुंच रहे हैं। कथा के दूसरे दिन रविवार को सुबह से ही सड़कों पर भक्तों की भारी उमड़ आई थी। कथा के बाद भंडारे का आयोजन किया गया। आयोजक रमाशंकर वाजपेयी ने बताया कि कथा सुनने के लिए आने वाले सभी श्रद्धालुओं के लिए भंडारे का इंतजाम किया गया है।
खजुराहो भव्य मंच से संगीतमय श्रीराम कथा का वर्णन करते संत मोरारी बापू