माता-पिता ये करें
मोदी के
मन की बात
ड्रग्स का पैसा बनता है आतंक की गोली, शहीद होते हैं जवान
सरकार ये करेगी
डार्कनेस (अंधेरा), डिस्ट्रक्शन (विध्वंस) और डेवास्टेशन (विनाश)
ड्रग्स लाता है \\\"3डी\\\'
नशा मिटाने के लिए छोड़ी नौकरी
गुरप्रेम लहरी|बठिंडा
गांवबहमनदीवाना के बलजीत सिंह पंजाब पुलिस की एएसआई रैंक की नौकरी छोड़ लोगों को नशे के नुकसान के प्रति जागरूक करने में लगे हैं। बलजीत की नौकरी के 8 साल बाकी थे। लेकिन उन्होंने लोगों को जागरूक करने के लिए रिटायरमेंट लिया। नौकरी के दौरान बलजीत की दिलचस्पी को देखते हुए उनको डॉ. जतिंदर जैन द्वारा जोनल स्पोर्ट्स वेलफेयर अफसर की जिम्मेदारी सौंपी गई। बलजीत अब नशा मुक्ति एकीकृत पुनर्वास केंद्र में नशा छोड़ने वाले लोगों के लिए फ्री काउंसलिंग कर रहे हैं। उन्हें इसकी प्रेरणा आईजी जतिंद्र जैन से मिली थी।
आसानी से मिलती है
}सिंथेटिक और प्रेस्क्रिप्शन वाले ड्रग्स। } बाजार में चार रु. में, ब्लैक मार्केट में 100 रु. की।
} किराना या केमिस्ट से बिना प्रेस्क्रिप्शन के भी मिलता है।
} हर ड्रग्स का कोड नाम होता है।
} स्मैक तो बेहद आसानी से उपलब्ध।
...कहां से आती है इतनी ड्रग्स
2 नंबर पर है नगालैंड के बाद नशे के मामले में
सबसे ज्यादा प्रभावित इलाका
शहरी: अमृतसरऔरग्रामीण : तरनतारन(सामाजिकसुरक्षा, महिला एवं बाल विकास विभाग की रिपोर्ट)
(15-25 साल के) नशे के आदी सीमाई इलाकों में
75% युवा
70%
ड्रग्स कारोबार है राज्य में
इस नशे में
कितनेडूबे
{अफगानिस्तान से पाकिस्तान :हेराेइन 1 लाख रु. प्रति किलो की दर से आती है।
{ पाकिस्तानसे पंजाब : यह30 लाख रु. प्रति किलो की दर से स्मगलिंग के जरिए पहुंचती है।
{पंजाब से पूरे देश में : 1करोड़ रु. प्रति किलो की दर से।
{देशसे विदेशी बाजार में : 5करोड़ रु. प्रति किलो की दर से।
{ अफसरजल्द बनाएं टोल फ्री हेल्पलाइन नंबर।
{सोशलमीडिया पर नशे के खिलाफ मुहिम चलाएं।
{जाने-मानेलोगों को अभियान से जोड़ें।
मतलब: बच्चेकी पांच वर्ष तक माता पिता प्रेम और दुलार का व्यवहार रखें। इसके बाद जब पुत्र 10 वर्ष का होने को हो तो अनुशासन होना चाहिए। सोलह साल का होने पर उसके साथ खुलकर बात होनी चाहिए।
पांच वर्ष लौ लीजिए।
दस लौ ताड़न देय,
सुत ही सोलह वर्ष में,
मित्र सरिज गुन देय।