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आज फैसला-ब्रिटेन से स्कॉटलैंड आजाद होगा या नहीं

7 वर्ष पहले
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करीब300 साल बाद स्कॉटलैंड आजाद होगा या नहीं इसका फैसला गुरुवार को होगा। स्कॉटलैंड के मतदाता यूनाइटेड किंगडम से अलग होने के जनमत संग्रह पर ‘यस’ या ‘नो’ पर मुहर लगाएंगे। पहला परिणाम रात दो बजे तक सकता है।

अंतिम परिणाम सुबह करीब छह बजे (भारतीय समयानुसार शुक्रवार सुबह 7:30 से 11:30 के बीच) आने की संभावना है। ‘यस’ और ‘नो’ दोनों के पक्ष में बुधवार देर रात तक प्रचार का माहौल गर्म रहा। ब्रिटिश प्रधानमंत्री डेविड कैमरन सहित कई बड़े नेता स्कॉटलैंड वासियों को आजादी से होने वाले नुकसान के बारे में बता गए। जबकि स्कॉटलैंड के फर्स्ट मिनिस्टर (मुख्यमंत्री) एलेक्स सैलमंड आजादी के पक्ष में भारी माहौल बनाए हुए हैं।

इस जनमत संग्रह के लिए 15 अक्टूबर 2012 को एडिनबरा में कैमरन और सैलमंड के बीच समझौता हुआ था। मार्च 2013 में इसके लिए 18 सितंबर 2014 की तारीख तय हुई। इसका ब्यौरा 26 नवंबर 2013 को प्रकाशित हुआ। स्कॉटलैंड के लोगों को जीवनकाल में यह एक ही मौका मिलेगा।

दो पूर्व प्रधानमंत्री भी आजादी के पक्ष में नहीं

पूर्वप्रधानमंत्री जॉन मेजर ने कहा कि अगर इंग्लैंड स्कॉटलैंड को खो देता है, तो ब्रिटेन की सैन्य शक्ति कमजोर पड़ जाएगी। ब्रिटेन अमेरिका के घनिष्ठ रिश्तों में भी कमजोरी जाएगी। वहीं पूर्व प्रधानमंत्री गॉर्डन ब्राउन ने वचन दिया कि आजादी की मांग छोड़ देने पर स्कॉटलैंड को ज्यादा अधिकार दिए जाएंगे।

{महारानी एलिजाबेथ द्वितीय ने गुरुवार के अपने सभी कार्यक्रम रद्द कर दिए हैं।

{स्कॉटलैंड के लोगों ने आजादी के बाद करेंसी संकट की आशंका में एटीएम से ज्यादा से ज्यादा रकम निकाल ली है।

{हिंसा भड़कने की आशंका के बावजूद स्कॉटलैंड के पब रातभर शराब परोसते रहेंगे।

ताजा सर्वे में 48 फीसदी ने कहा ‘नो’

मतदानके पहले कई तरह के सर्वे हो चुके हैं। ताजा सर्वे के अनुसार ‘यस’ के पक्ष में 44 और ‘नाे’ के पक्ष में 48 प्रतिशत मतदाता रहे। जबकि आठ प्रतिशत ने अभी तय नहीं किया है। पिछले सर्वे में आजादी की मांग करने वालों की संख्या ज्यादा थी। डेली टेलीग्राफ, आईसीएम और डेली मेल जैसे अखबारों ने मंगलवार को सर्वे जारी किए।

महारानी ने रद्द किए गुरुवार के सभी कार्यक्रम