- Hindi News
- National
- फेसबुक बोर्ड मेंबर ने कहा न्यूट्रैलिटी पर भारत का फैसला गलत, ये देश ब्रिटिश शासन के अधीन रहता तो अ
फेसबुक बोर्ड मेंबर ने कहा-न्यूट्रैलिटी पर भारत का फैसला गलत, ये देश ब्रिटिश शासन के अधीन रहता तो अच्छा होता
सोशल मीडिया पर गुस्सा
अधिकारी ने ट्वीट हटाया, कहा-अब भारत पर कभी कोई चर्चा नहीं करूंगा
मार्क लॉवेल एंड्रीसन फेसबुक संस्थापक मार्क जकरबर्ग के सबसे भरोसेमंद लोगों में शामिल हैं। 4020 करोड़ रुपए की नेटवर्थ रखने वाले मार्क ने अमेरिका की 44 कंपनियों में 55 तरीकों से इन्वेस्टमेंट कर रखा है। 20 कंपनियों के सलाहकार भी हैं। वे वर्ल्ड वाइड वेब हॉल ऑफ फेम में दुनिया के टॉप 6 लोगों में शामिल हैं। मोजैक वेब ब्राउजर, नेट स्कैप के को फाउंडर भी हैं। सॉफ्टवेयर कंपनी ऑप्सवेयर मार्क ने ही बनाई थी, जो बाद में एचपी को बेच दी। वे फेसबुक के अलावा ईबे और एचपी के बोर्ड में भी हैं। 2012 में मार्क को टाइम मैगजीन के 100 प्रभावशाली लोगों में भी जगह मिली थी।
भारत के बड़े बाजार में मिली हार से तिलमिलाया फेसबुक
फेसबुक ने पिछले दिनों 36 बड़े देशों में अपनी फ्री बेसिक्स स्कीम शुरू की थी। चूंकि भारत में 13 करोड़ फेसबुक यूजर्स हैं और इनकी संख्या तेजी से बढ़ रही है। इसलिए जकरबर्ग चाहते थे कि भारत में ये स्कीम लागू हो जाए। इसके लिए वे कैंपेन भी चला रहे थे।
जकरबर्ग के सबसे भरोसेमंद लोगों में हैं मार्क
भास्कर न्यूज/एजेंसी |नई दिल्ली
भारत के नेट न्यूट्रैलिटी के समर्थन में आने और अपनी फ्री बेसिक्स की महत्वाकांक्षी योजना अटकने से फेसबुक तिलमिला सा गया है। बुधवार को फेसबुक के एक बोर्ड डायरेक्टर ने ट्वीट किया कि भारत ब्रिटिश शासन के अधीन ही रहता तो अच्छा होता।
इस अधिकारी का नाम है- मार्क एंड्रीसन। मार्क सिलिकॉन वैली के सबसे बड़े पूंजीपतियों में से एक हैं और फेसबुक के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स के सदस्य हैं। वो इस बात से भड़के हुए हैं कि लाख कोशिशों के बावजूद फ्री बेसिक्स भारत में काम नहीं कर पाया। दो दिन पहले ट्राई नेट न्यूट्रैलिटी खत्म करने से मना कर दिया था। हैरान करने वाली बात ये है कि मार्क को लगता है कि भारत नेट न्यूट्रैलिटी जैसे फिजूल के विचार का समर्थन कर रहा है। मार्क ने कहा कि इंटरनेट टैरिफ को लेकर भारत का फैसला सही नहीं है। ये देश ब्रिटिश शासन के ही अधीन होता तो इसकी हालत ज्यादा बेहतर होती। शेष|पेज 6 पर
मार्क एंड्रीसन ने ट्वीट किया कि उपनिवेशकवाद विरोध के चलते तो भारतीयों को दशकों तक आर्थिक नुकसान हुए हैं तो अब इसे क्यों रोका जा रहा है? उनके इस ट्वीट पर ट्विटर से लेकर फेसबुक तक पर जमकर गुस्सा निकाला जाने लगा। लोगों ने उनकी सोच और दिमागी संतुलन तक पर सवाल उठाए। विवाद बढ़ता देख उन्होंने अपना ट्वीट डिलीट कर दिया। ट्वीट डिलीट किए जाने के बावजूद स्क्रीनशॉट अब भी री-ट्वीट व शेयर किए जा रहे हैं। उनसे पूरे देश से माफी मांगने को कहा जा रहा है। विवाद बढ़ता देख मार्क ने एक के बाद एक कई ट्वीट किए। एक ट्वीट में लिखा- मैं भारत ही नहीं, किसी भी देश में उपनिवेशवाद का विरोधी हूं। एक अन्य ट्वीट में लिखा- अब वे भारत की अर्थव्यवस्था और राजनीति पर कभी चर्चा नहीं करेंगे। लेकिन लोग नहीं रुके। मार्क के खिलाफ 6 घंटे में सैंकड़ों ट्वीट और फेसबुक मैसेज हुए। एक कमेंट था-क्या फेसबुक ये सोचकर बैठा है कि भारत अब उनका गुलाम हो जाएगा?’ एक का कटाक्ष था-पहली बार देखा कि कोई कुछ मुफ्त में देने के लिए इतना मरा जा रहा है कि सबसे लड़ाई मोल लेने को भी राजी है। अधिकांश ने तो यहां तक लिख दिया कि अब भारतीयों को फेसबुक का बहिष्कार कर देना चाहिए। एक कमेंट था-अगर भारत के आधे युवा भी फेसबुक से नाराज हो गए तो जकरबर्ग को लेने के देने पड़ जाएंगे। इन टिप्पणियों के बाद एंडरसन ने ट्वीट किया- गुड नाइट इंडिया!