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  • मैनेजमेंट फंडा एन. रघुरामन Raghu@dbcorp.in

मैनेजमेंट फंडा एन. रघुरामन raghu@dbcorp.in

7 वर्ष पहले
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यदि आपगूगल में यह लाइन टाइप करें, ‘ईट योर फ्राग फर्स्ट’ तो आपके सामने पांच मिनट का वीडियो जाएगा। वीडियो का मूल संदेश यह है: हर दिन की शुरुआत पर उस दिन के सबसे कठिन काम को रेखांकित कीजिए और ‘ईट फ्राग फर्स्ट’ यानी सबसे कठिन काम पहले कीजिए और फिर देखिए कैसे वह दिन आपके लिए लंबा और आसान हो जाता है।

यही तो इस वर्ल्ड कप में भारतीय क्रिकेट टीम के साथ हुआ। भारतीय टीम के लिए सबसे कठिन मैच अपने कट्‌टर प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान के साथ होता है, फिर चाहे सारी परिस्थितियां उसके अनुकूल ही क्यों हो। दूसरा कठिन काम उनके लिए था दक्षिण अफ्रीका जैसी सर्वाधिक पेशेवर टीम के खिलाफ खेलना। यहां तक कि सचिन तेंडुलकर ने भी इस टीम के खिलाफ भारतीय टीम को सतर्क किया था।

और वर्ल्ड कप के दो लगातार शुरुआती मैचों में भारतीय टीम दोनों टीमों के खिलाफ जीत हासिल करने में कामयाब रही यानी उसने ‘ईट फ्राग फर्स्ट’ का काम कर लिया। उसने कठिन काम को शुरुआत में सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। इस टूर्नामेंट में उतरने के पहले टीम के सबसे अनुभवी गेंदबाज इशांत शर्मा के खेलने की संभावना खत्म हो गई थी, जबकि दो वर्षों में सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजों में गिने जाने वाले भुवनेश्वर कुमार भी चोटिल हो गए। विशेषज्ञों के लिए यह जुमला आम हो गया था कि हम ‘गेंदबाजी में कमजोर’ हैं।

कमजोर होने के इस जुमले के साथ ही हम सबसे कड़े पाकिस्तान के खिलाफ मुकाबले में उतरे और पूरे दमखम के साथ जीते। कारण यह रहा कि मोहम्मद शमी ने दो मैचों में छह विकेट लिए, रविचंद्रन अश्विन सहित उमेश यादव, मोहित शर्मा सहजता से लय में गए। यह अलग बात है कि दोनों मैचों में भारतीय टीम 300 रनों का आंकड़ा पार करने में कामयाब रही, जिससे गेंदबाजों का मनोबल ऊंचा रहा।

क्रिकेट इसकी अनिश्चितता के लिए जाना जाता है। गुरुवार सुबह का चार्ट देखिए। ग्रुप बी में भारत शीर्ष पर और पाकिस्तान सबसे नीचे है। ग्रुप में बांग्लादेश और अफगानिस्तान, दशकों से पेशेवर क्रिकेट खेल रहे इंग्लैंड से ऊपर हैं। और जरा आयरलैंड को तो देखिए। इसने भारत जितने ही मैच जीतकर सर्वश्रेष्ठ क्रिकेट विशेषज्ञों को भी चकित कर दिया है। किंतु यह बिल्कुल अलग कहानी है।

अनिश्चितता के कारण क्रिकेट पराजय के बारीकी से विश्लेषण चीर-फाड़ के लिए ख्यात है, लेकिन इसे खेलने वाला कोई राष्ट्र या क्रिकेट विशेषज्ञ कभी जीत की चीर-फाड़ नहीं करता। वे खुद से यह सवाल तो कर सकते हैं कि वे क्यों पराजित हुए पर यह कभी नहीं पूछेंगे कि उन्हें जीत कैसे हासिल हुई? यही वजह है कि कई टीमें जीत के कारण समझ नहीं पातीं।

वह टीम जो जीत के कारणों को समझती है, अंतत: उसके उन शक्तिशाली पहलुओं पर काम करती है तथा खुद को और शक्तिशाली टीम बना लेती है। संभव है कि कारण एक से अधिक हों, लेकिन उन्हें समझना मझधार में ही यह कहकर जश्न मनाने से ज्यादा महत्वपूर्ण है कि ‘पाकिस्तान के खिलाफ जीतना, वर्ल्ड कप जीतने के बराबर है।’ यह अपरिपक्व क्रिकेटप्रेमियों की ओर से दिया गया बयान है।

‘फ्राग ईटिंग’ के बाद यानी उन टीमों को हराने के बाद, जो भावनात्मक और तकनीकी रूप से हमसे मजबूत हैं, हमारा अगला काम जीत का बारीकी से विश्लेषण कर यह समझना है कि आगामी मैचों में टीम के हर सदस्य की भूमिका क्या है और ग्राउंड में ‘हडल’ यानी एकजुट होने के समय ‘फिर कर दिखाओ’ का नारा देने के अलावा यह भी देखना है कि हमारे पास कौन-सा बैकअप उपलब्ध है। यह कहना जल्दबाजी होगी कि हम फिर वह कर दिखाएंगे या नहीं, लेकिन जीत हासिल करने के लिए यह सर्वाधिक साबित हो चुकी विधि है।

फंडायह है कि यदि आप सफलता का स्वाद लगातार चखना चाहते हैं और तो इसे समझने का प्रयास करते रहिए कि पहली बार यह आपको कैसे मिली थी तथा कहां आपको अधिक मजबूती देनी की कोशिश करनी चाहिए।

सफलता को जारी रखना है तो इसके कारणों को समझिए