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यूरिया नहीं मिलने पर किसानों का गुस्सा देख व्यापारियों ने बंद कर दिए प्रतिष्ठान
खेतों में गेहूं की फसल 15 से 25 दिन की होकर खड़ी है। एक सप्ताह में अगर फसल में यूरिया नहीं डाला तो फसल की बढ़वार रुक जाएगी।
भास्करसंवाददाता|सबलगढ़
अंचलमें यूरिया का संकट विकराल रूप लेता जा रहा है। शनिवार को सबलगढ़ में पुलिस थाने से पर्चियों का वितरण होने पर आक्रोशित किसान बाजार बंद कराने के लिए निकले तो पुलिस ने उन्हें खदेड़ दिया। इससे आक्रोशित किसानों ने थाने पर पथराव कर दिया। किसानों के उग्र तेवर देख व्यापारियों ने अपने-अपने प्रतिष्ठानों के शटर नीचे गिरा दिए। सुरक्षा की दृष्टि से बाजार में जगह-जगह पुलिस बल तैनात कर दिया गय है। दोपहर 12 बजे के बाद सामान्य स्थित होने पर बाजार खोला जा सका।
शनिवार को सुबह हल्की बारिश कंपकपाती ठंड में अंचल के सैकड़ों किसान खाद की पर्चियां लेने पुलिस थाने आए हुए थे। सुबह साढ़े आठ बजे तक जब उन्हें खाद की पर्चियां नहीं मिले तो वे थाना परिसर में हंगामा करने लगे। इस बीच उन्हें बताया गया कि खाद का स्टॉक समाप्त हो गया है। स्टॉक आने के बाद ही पर्चियां बांटी जाएंगी। यह सुनते ही किसानों ने जिला प्रशासन सहित मप्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी करना शुरू कर दिया। इसी बीच कुछ किसान आक्रोशित होकर पुलिस थाने पर पथराव करने लगे। बुजुर्ग किसानों की समझाइश के बाद प्रदर्शनकारियों ने अपना रुख बाजार की ओर कर दिया। किसानों की मांग पर बाजार के सभी व्यापारियों ने अपने-अपने प्रतिष्ठानों के शटर नीचे गिरा दिए। बाजार बंद होने की खबर मिलते ही भारी पुलिस बल प्रदर्शन कर रहे किसानों के बीच पहुंच गया।
इसलिए हुआ हंगामा
जिलाविपणन संघ द्वारा गुरुवार की शाम सबलगढ़ में 103 मीट्रिक टन खाद पहुंचाया था। लेकिन यह खाद शुक्रवार को ही समाप्त हो गया। शुक्रवार शाम को कई किसान बगैर खाद लिए ही लौट गए। शनिवार को भी भारी संख्या में किसान खाद लेने पुलिस थाने आए थे। किसानों का कहना था कि जब पर्चियों का वितरण नहीं करना था तो हमें ऐसी ठंड में क्यों बुलाया गया।
ऐतिहात के तौर पर गश्त करती पुलिस।
सबलगढ़: किसानों के प्रदर्शन के बाद बंद हुआ सबलगढ़ का बाजार।
उपद्रव की आशंका से घबराए थे अधिकारी
खादकी किल्लत से आक्रोशित सबलगढ़ क्षेत्र के किसानों ने 18 दिसम्बर 2006 को रेस्ट हाउस, तहसील कार्यालय सहित मार्केटिंग सोसाइटी के भवन को आग लगाकर क्षतिग्रस्त कर दिया था। शनिवार को भी किसानों के उग्र