कोल माइंस पेंशन नीति का विरोध
{दिल्ली जाकर मंत्री से मिला प्रतिनिधि मंडल, नहीं मिला स्पष्ट जवाब
नगरसंवाददाता|सारनी
कोलइंडिया से रिटायर हुए पेंशनर्स बेहद परेशान हैं। कम पेंशन और अन्य सुविधाएं नहीं मिलने के कारण जीवन यापन मुश्किल हो गया है। अब वे एकजुट होकर लड़ाई लड़ेंगे। कोल इंडिया पेंशनर्स वेलफेयर एसोसिएशन ने पिछले दिनों दिल्ली जाकर मंत्री से मुलाकात की, लेकिन कोई ठोस जवाब नहीं मिला। पेंशनर्स कोल माइंस पेंशन स्कीम 1998 में सुधार की मांग कर रहे हैं। एसोसिएशन के केंद्रीय अध्यक्ष विपिन चौहान ने बताया कि कोल माइंस पेंशन स्कीम 1998 में न्याय संगत सुधार, के बारे में मांग पत्र भारत सरकार के प्रधानमंत्री और कोयला मंत्री को दिया गया। ठोस जवाब नहीं मिलाने के कारण आगे की रणनीति तैयार की जा रही है। पेंशन स्कीम में भारी विसंगतियां हैं। सेवा निवृत्त खान कामगार का जीवन गरीबी रेखा से नीचे हो गया है। नीतियों के कारण कोयला उद्योग पेंशनर्स का शोषण कर रहा है। उन्हीं के वेतन से एक अंश काटकर पेंशन तैयार की जाती है। कामगार रिटायर होता है तो 300 रुपए प्रतिमाह से 3000 रुपए प्रतिमाह तक की एकदम कम पेंशन मिलती है। महंगाई भत्ता भारत सरकार वेतन का 50 फीसदी देती है, लेकिन यहां कुछ नहीं हो रहा है।
केवल कामगारों और रिटायर्ड लोगों के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। प्रतिनिधि मंडल में भीमराव बोड़खे, एस. करकुरे, महादेव गावंडे, हरि जागेकर, छोटलाल पवार, भीराव साबरे, संग्रामसिंह, जयराम विश्वकर्मा, नौखेलाल पटेल, बंशी नंदलाल समेत अन्य लोग शामिल थे। श्री चौहान ने बताया कि भारत सरकार के सभी संगठन और श्रमिक संगठनों के पदाधिकारियों से चर्चा कर आंदोलन की रणनीति तैयार की जाएगी। मिलकर नीति का विरोध करेंगे।