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प्रबंधन के निर्णय का विरोध, संगठन ने कहा- माफी मांगंे
{जीएम के आश्वासन पर उठे श्रमिक, सुबह सामान्य गेट मीटिंग के लिए पहुंचे थे
नगरसंवाददाता|सारनी
वेस्टर्नकोल फील्ड्स की शोभापुर खदान में सुबह के समय एक साथ पांच पालियां खदान में उतार दी गई। प्रबंधन ने एकतरफा निर्णय लेते हुए एक-एक घंटे के अंतराल में पालियों का समय तय कर दिया। खदान पर गेट मीटिंग के लिए पहुंचे संगठनों ने इसका विरोध किया और प्रबंधन को माफी मांगने को कहा, लेकिन विवाद हो गया। इसके बाद श्रमिकों ने खदान में काम नहीं होने दिया। मोहरे के बाहर बैठकर श्रमिकों ने नारेबाजी की और दिन भर हड़ताल की। इससे खदान का करीब 1500 मीट्रिक टन उत्पादन प्रभावित हुआ।
सामान्य दिनों में खदानों में सुबह, शाम और रात को तीन शिफ्टों में काम होता है। सुबह एक ही शिफ्ट के लोग खदान में उतरते हैं। मंगलवार को शोभापुर खदान पर प्रस्तावित गेट मीटिंग के पहले ही प्रबंधन ने एक-एक कर पांच शिफ्ट उतारने का निर्णय लिया। इसमें से करीब 74 श्रमिक खदान में उतर भी गए। इसके बाद गेट मीटिंग के लिए पहुंचे संयुक्त मोर्चे को इसकी जानकारी लगी। संगठनों के लोगों ने इनका विरोध किया, लेकिन प्रबंधन गलती मानने को तैयार नहीं था। श्रमिक माफी मांगने का कह रहे थे, लेकिन प्रबंधन इसे लेकर भी तैयार नहीं हुआ। विरोध में पांचों श्रमिक संगठनों ने मोर्चा खोल दिया। प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी की। खदानों में श्रमिकों को उतरने नहीं दिया। दिन भर यहां डटे रहे। श्रमिक नेताओं ने सभी को संबोधित किया। केंद्र सरकार को भी श्रमिकों ने जमकर कोसा। इस मौके पर दामोदर मिश्रा, अशोक नामदेव, कामेश्वर राय, भरत सिंह, डॉ. नारायण, आशिक खान, मुबारिक खान, गंगाराम तिवारी, पिरथी बारपेटे, अमृतलाल रघुवंशी, ब्रजेंद्र सिंह समेत अन्य लोग यहां मौजूद थे। उन्होंने दिन भर श्रमिकों को संबोधित किया। शाम को प्रबंधन ने चर्चा की। कार्रवाई का आश्वासन दिया।
शाम को जीएम से चर्चा करने के बाद श्रमिक संगठन माइन से हटे। संगठनों के सदस्यों ने आग्रह किया कि प्रथम पाली में खदान में जाने वाले लोगों को प्रबंधन ने वेतन और हाजिरी काटे जाने की धमकी दी है। सीजीएम ने मौखिक आश्वासन दिया कि किसी की भी हाजिरी नहीं काटी जाएगी। ना ही किसी पर कोई कार्रवाई होगी। संयुक्त मोर्चा के पदाधिकारियों ने प्रबंधन से आश्वासन को लिखत रूप में देने की मांग की है।
सारनी की शोभापुर खदान पर गेट प्रबंधन से