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गरीबों के आवास बनाने के लिए नहीं मिल रही जमीन
कंसलटेंट नियुक्त किए जा रहे हैं
जमीन नहीं, कैसे पूरी होगी योजना
{नगर पालिका ने डीपीआर की प्रक्रिया शुरू की
नगरसंवाददाता|सारनी
गरीबोंके लिए सरकारी मकान बनाने की योजना में जमीन का रोड़ा रहा है। शहर में राजीव गांधी आवास योजना के तहत 5 सैकड़ा आवास बनाए जाने हैं। नगर पालिका के पास बजट भी है। मगर, शहर और इसके आसपास सरकारी जमीन नहीं मिल रही है। नतीजा यह है कि योजना पर अभी कोई काम ही नहीं हो पाया है। केंद्र सरकार की योजना होने के कारण नगर पालिका पर इसका दबाव भी है, लेकिन जमीन मिले तो काम बने।
नगर पालिका क्षेत्र में गरीबी रेखा के नीचे जीवन जीने वाले 500 परिवारों के लिए मकान बनाने की योजना प्रस्तावित है। केंद्र और राज्य सरकार की ओर से इसके लिए बाकायदा नगर पालिका को टारगेट दिया है। पांच सैकड़ा परिवारों के लिए मकान बनाने के टारगेट पर नगर पालिका विशेष ध्यान देकर जमीन ढूंढ रही है। मगर, इतनी जल्दी जमीन मिल पाना मुश्किल है।
दरअसल, सारनी में पॉवर जनरेटिंग कंपनी और पाथाखेड़ा में डब्ल्यूसीएल की जमीन है। बची जमीन वन विभाग के क्षेत्र की है। ऐसे में गरीबों के ये 500 आवास कहां बनेंगे तय नहीं हो पा रहा है। हालांकि नगर पालिका को उम्मीद है कि जल्द ही आस-पास जमीन मिल जाएगी। इसके लिए डीपीआर तैयार करने की कार्रवाई की जा रही है। सरकारी जमीन मिल जाती है तो काम भी शुरू हो जाएगा। अभी योजना पर प्रारंभिक रूप से काम चल रहा है। जब तक जमीन नहीं मिलेगी नगर पालिका तब तक किसी तरह का टेंडर आदि नहीं कर सकेगी। ऐसे में परेशानी खड़ी हो जाएगी। बड़ी परेशानी यह है कि योजना पर केंद्र और राज्य सरकार की कड़ी मॉनीटरिंग हो रही है। नगर पालिका के कर्मचारियों के लिए आवास की योजना भी फिलहाल कागजों में इसलिए अटकी है क्योंकि शहर में जमीन नहीं मिल रही है। जमीन मिल जाए तो इस योजना को भी मंजूरी मिल सकती है। अधिकारी और कर्मचारी अभी भी पॉवर जनरेटिंग कंपनी और डब्ल्यूसीएल के आवासों में रहते हैं।
राजीवगांधी आवास मिशन के फार्म बुलवाए हैं
शहरीविकास अभिकरण के क्लर्क महेश साहू ने बताया कि राजीव गांधी आवास मिशन नई योजना है। यह हाल ही में प्रभाव में आई है। आवास बनाने के लिए लोन दिया जाना है। नपा के माध्यम से फार्म भरवाकर बैंक को भिजवाए जाने हैं। अभी फार्म बुलवाए गए हैं। किसी भी आवेदन को भेजा नहीं गया है। नगरपालिका के कार्