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मठारदेव मंदिर को ट्रस्ट बनाने की तैयारी, मेले के पहले काम पूरा करने के निर्देश

7 वर्ष पहले
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मठारदेवबाबा मंदिर को ट्रस्ट बनाने की कवायद तेज हो गई है। बुधवार को नगर पालिका अध्यक्ष और अधिकारियों ने सर्वे किया। इस दौरान ट्रस्ट बनाने को लेकर चर्चा हुई। नगर पालिका के अधिकारी मंदिर को ट्रस्ट बनाने पर ज्यादा जाेर दे रहे हैं। इसकी तैयारी भी करीब पूरी कर ली गई है। यदि सब कुछ सही रहा तो मेले के पहले नगर पालिका इसे ट्रस्ट के रूप में विकसित कर देगी। बुधवार को सर्वे के लिए पहुंचे अधिकारियों ने काम को तेज करने के निर्देश दिए।

मठारदेव बाबा के मंदिर को ट्रस्ट के रूप में विकसित करने की तैयारियां जोरों पर चल रही हैं। मगर, नगर पालिका की यह याेजना सफल नहीं हो पा रही है। सीएमओ ने मंदिर को ट्रस्ट के रूप में विकसित करने की तैयारी शुरू की थी। नगर पालिका ने अभी तक कोई सर्वे नहीं किया। इससे ट्रस्ट का गठन नहीं हो सका है। नपा सीएमओ अशोक शुक्ला ने बताया कि मठारदेव मंदिर को ट्रस्ट बनाने की प्रक्रिया अंतिम चरणों में है। कुछ औपचारिकताएं बची हैं।















































लोगों से संपर्क कर इन्हें भी पूरा कर लिया जाएगा। उम्मीद है जल्द ही प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। कार्यों को भी मेले के पहले पूरा करने के निर्देश दिए हैं। श्रद्धालुओं के लिए इस वर्ष भी नगर पालिका पहले से बेहतर सुविधाएं देंगी।

सीढ़ियों को सुविधाजनक बनाने के निर्देश

मंदिरऔर आस-पास के क्षेत्रों के अलावा अधिकारियों की टीम ने यहां सीढ़ियों का निरीक्षण किया। सीएमओ अशोक शुक्ला ने उपयंत्री रविंद्र वराठे को सीढ़ियों के सुधार के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सीढ़ियां तो बेहतर क्वालिटी की बनाई गई हैं, लेकिन डिजाइन में गड़बड़ी है। इसे भी सिरे से सुधारने की जरूरत है। शुरुआत में ही श्रद्धालुओं को इसमें तकलीफ होगी। इसलिए उन्होंने मेले के पहले सुधार के निर्देश दिए।

नपाध्यक्ष बोली- मेले के पहले काम करो

मठारदेवबाबा के मंदिर में निरीक्षण के लिए पहुंची नगर पालिका अध्यक्ष मीनाक्षी मोहबे ने धीमी गति पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि मेले में लाखों श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। निर्माण कार्यों की गति बढ़ेगी तो श्रद्धालुओं को यहां तकलीफ नहीं होगा। काम पूरे हो जाएंगे तो रुकने की जगह भी हो जाएगी। निर्माण कार्यों का मटेरियल भी यहां-वहां नहीं फैला रहेगा। मेले को एक महीने से भी कम समय बचा है।

सारनी| मठारदे