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बनखेड़ा के विंध्यावासिनी मंदिर में श्रद्धालु बना रहे पार्थिव शिवलिंग

4 वर्ष पहले
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कलियुग में शिवपूजन व पार्थिव शिवलिंग के पूजन का विशेष महत्व है। इसके पूजन करने वाले भक्तों पर सदैव शिव की कृपा बनी रहती है। भगवान भक्तों का उद्धार करते हैं। साथ ही इस लोक में यश वैभव प्राप्त करने जीवन मरण के चक्र से मुक्ति मिल जाती है। यह बातें पूर्व विधायक रमेश सक्सेना ने बनखेड़ा गांव में विंध्यवासिनी देवी माता मंदिर में आयोजित कार्यक्रम में कही।

सावन माह पर्व के मौके पर माता मंदिर में पांच दिवसीय सवा लाख पार्थिव रुद्र निर्माण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। श्री सक्सेना ने बताया कि पार्थिव के निर्माण के साथ ही भगवान भोलेनाथ की कृपा से बारिश का आगाज हो गया है। यज्ञाचार्य पंडित राधेश्याम शास्त्री ने बताया कि यहां पर लगातार चार सालों से विंध्यवासिनी देवी मंदिर में क्षेत्र की सुख-समृद्धि के लिए पार्थिव रुद्री निर्माण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। सावन माह को शिव का माह माना जाता है, इसलिए इस माह में पार्थिव शिवलिंग बनाकर शिव पूजन का विशेष पुण्य कार्य शिवभक्तों को मिलता है। कलियुग में सबसे पहले पार्थिव पूजन ऋषि के पुत्र मंडप ने किया था। प्रभु के आदेश पर जगत के कल्याण के लिए उन्होंने पार्थिव शिवलिंग बनाकर शिव अर्चन की थी।

उन्होंने बताया कि पार्थिव लिंग पूजन से भक्तों का उद्धार होता है। पूजन के लिए दूध, दही, बूरा, शहद, घी से अभिषेक करें। गंगाजल, चंदन, कमल गट्टे, काले तिल, साठी के चावल, धूप, जौ, बेल पत्र, भांग, धतूरा, मदार पुष्प, शमी पत्र, अर्पण कर शिव का मना सकते हैं। इस अवसर पर अमर सिंह, रामरतन गौर, दीपक समाधिया, विकास विश्वकर्मा, रमेश पटेल, विश्राम सिंह, महेश शर्मा, बाला प्रसाद, रामस्वरूप ठाकुर, भगवान सिंह यादव, परमानंद मीणा आदि श्रद्धालु उपस्थित थे।

17 को होगा शिवलिंग अभिषेक

पूर्व विधायक श्री सक्सेना ने बताया कि पांच दिवसीय सवा लाख पार्थिव रुद्री निर्माण के आयोजन के उपरांत 17 जुलाई को महा अभिषेक और प्रसादी वितरण कार्यक्रम किया जाएगा।

बनखेडी माता मंदिर में शिवलिंग का निर्माण करते हुए पूर्व विधायक।

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