काव्य निशा में बरसा काव्य रस
हिन्दीदिवस पखवाड़े के तहत अखिल भारतीय साहित्य परिषद तहसील इकाई जावर के तत्वावधान मे श्रीराम मंदिर प्रांगण में काव्य निशा का आयोजन किया गया। इसमें कवियों ने कई प्रकार की कविता सुनाकर श्रोताओं को गुदगुदाया।
काव्य निशा में सीहोर के रामनारायण राठौर ने लावा सा तप रहा अर्वान काजन, चुनरिया धानी भींग जाय रे सुनाकर ऊंचाई प्रदान की। सुरेश श्रीवास्तव ने हिंद को काटकर धर्म को बांटकर पुकारा हमने सुनाकर देश वासियों को सचेत किया। वहीं मेहफूज खां ने मोड़ी ने मोतियों का हार दिया जनता ने इधर से शुक्रिया तथा अपनी हस्ती मिटा दो वतन के लिए सुनाकर वातावरण को गजलमय किया। बृजेश शर्मा, मूलचंद्र धारवां ने हास्य व्यंग की रचना सुनाकर जमकर हंसाया।
इसी प्रकार वीपी शर्मा सीहोर, बाबूलाल पटेल, डॉ.ओम प्रकाश दुबे, जयनारायण राठौर, डीआर राव, राजकुमार भाटी, राजकुमार सोनी, दयाराम परिहार, चंद्रशेखर राव, सुभाष भावसार ने रचनाओं का पाठ किया। कार्यक्रम में उपस्थित श्रोताओं ने कवियों को तालियों की गडग़ड़ाहट से ताजगी प्रदान की।
इनकीपंक्तियों को सराहा : काव्यनिशा में जयनारायण राठौर की जिस मंत्र से हिन्द आजाद हो गया वंदे मातरम क्यों विवाद हो गया।
बाबूलाल पटेल की देश की जबान प्रकृति का वरदान, बृजेश शर्मा हिन्दी तो मेरे देश की भाषा है डीआर राव आदि की कविताओं का सराहा गया। इस अवसर पर दयाराम परिहार, कमलेश खत्री, मोहन सिंह आचार्य, कमलेश ठाकुर, सुभाष भावसार, जीवन सिंह ठाकुर, धीरज सिंह, राजेंद्र सिह, राजू भावसार, तेज सिंह ठाकुर, सोभाल सिंह, मुकेश पांचाल, सुदीप सिंह, विजय गुप्ता आदि उपस्थित थे।
जावर. िहंदी दिवस के उपलक्ष्य में काव्य निशा का आयोजन किया गया।