3 साल में सिर्फ जमीन ही कर पाए समतल
अक्टूबर 2012 में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान जब शेरपुर आए थे और उन्होंने रेल इंजन कारखाने की आधारशिला रखी थी तो इस छोटे से गांव सहित जिला मुख्यालय के लोगों में एक अलग उत्साह था। 18 फरवरी को इसी शेरपुर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आ रहे हैं लेकिन तीन साल बाद भी यहां पर कारखाना बनाने की शुरुआत नहीं हो सकी है। कारखाने का निर्माण कार्य इन तीन सालों में केवल जमीन को समतल करने तक ही सीमित रहा।
इस कारखाने को बनाने के लिए करीब 250 करोड़ रुपए का निवेश होना है। यहां पर रेल इंजन का निर्माण किया जाना था। इसके लिए कंपनी को पहले चरण में 25 एकड़ जमीन दी गई। इसके बाद संबंधित निर्माण एजेंसी का कहना था कि उसे जमीन पूरी चाहिए। इसके बाद 11 एकड़ जमीन और कंपनी को देने के लिए अधिकृत कर दी गई। इस तरह से यह कारखाना 36 एकड़ के रकबे में बनाया जाना है।
शुरू होता तो 700 लोगों को मिलता रोजगार
यदि यह कारखाना शुरू हो जाता तो करीब 700 लोगों को रोजगार मिल जाता। रोजगार केवल स्थानीय लोगों को दिया जाना था। इससे बेरोजगारों को काफी उम्मीद थी लेकिन उनका सपना अभी साकार नहीं हो सका।
27 अक्टूबर को सीएम ने रेल कारखाना शुरू करने की घोषणा की थी।
सीएम के आने से पहले
काम शुरू फिर बंद
एक जून 2015 को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सीहोर आए थे तो उनके आने से दो दिन पहले कंपनी ने काम की शुरुआत कर दी थी। इसके बाद शेरपुर में तय जमीन पर काम शुरू कर दिया गया। शुरुआती दौर में जमीन के समतलीकरण के लिए यहां पर दो जेसीबी काम कर रही थीं। इसके बाद काम फिर से अटक गया।
अनुमति लेने में लगा समय
रेल इंजन कारखाने का काम बीच में शुरू हुआ था। यहां पर जमीन को समतल किया गया था। कंपनी का कहना है कि कारखाना खोलने के पूर्व कई अनुमतियां ली जाती हैं। इसमें काफी समय लग गया। -राजेश अग्रवाल, महाप्रबंधक उद्योग विभाग