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ई-स्टांप जनरेट कर फाेटो कॉपी से हूबहू बनाया, नंबर से पकड़ में आई गड़बड़ी

5 वर्ष पहले
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रजिस्ट्री में होने वाली गड़बड़ी को रोकने के लिए शासन ने कुछ समय पहले पूरे प्रदेश में ई-पंजीयन सेवा शुरू की थी लेकिन इसमें भी असली ई स्टांप पेपर में छेड़छाड़ कर नकली तैयार करने का मामला सामने आया है। मामले में आरोपी सर्विस प्राेवाइडर का लायसेंस निलंबित कर दिया है। पुलिस में भी मामला दर्ज कराया गया है।

आष्टा तहसील के सर्विस प्रोवाइडर मो. फैजान को एक हजार के स्टांप की जरूरत थी। उसने 20 जनवरी को 500 रुपए का एक स्टांप जनरेट किया। इसके बाद उसी से मिलते हुए पेपर पर उसकी फोटो कॉपी की। लेकिन इस दौरान स्टांप के नंबर से छ़ेड़छाड़ करने पर मामला पकड़ में आ गया। इसके बाद पुलिस में मामला दर्ज कराया गया।

शिकायत पर ऐसे खुला फर्जीवाड़े का मामला
इस मामले में आष्टा निवासी सुमेर सिंह ने एसडीएम आष्टा कार्यालय में एक आवेदन दिया था और बताया था कि इस तरह से फर्जी तरीके से ई-स्टांप पेपर से रजिस्ट्री कराई गई है। इसी तरह दूरभाष पर जिला पंजीयक र|ेश भदौरिया से भी इसकी शिकायत की गई थी। श्री भदौरिया ने इसकी जांच के लिए आष्टा सब रजिस्ट्रार केसर जहां कुरैशी को निर्देशित किया। इसके बाद दोनों स्टांप पेपर बुलाए गए और इस मामले में सर्विस प्रोवाइडर को स्पष्टीकरण संबंधी नोटिस जारी किया गया। इस पर उसने जबाव दिया कि तकनीकि के कारण यह हुआ है। मेरी आईडी का किसी जुबेर खान नाम के व्यक्ति ने इस्तेमाल किया है जिससे यह सब हुआ है। इससे मेरा कोई संबंध नहीं है। इसके बाद श्री भदौरिया ने पूरे मामले से कलेक्टर डॉ. सुदाम खाड़े को अवगत कराया। श्री खाड़े के निर्देश पर कड़ी कार्रवाई करते हुए उन्होंने संबंधित का लायसेंस निलंबित कर दिया है। साथ ही इस मामले की आष्टा थाने में शिकायत दर्ज कराई गई है।

6 माह की हो सकती है सजा

श्री भदौरिया ने बताया कि ई-स्टांप पेपर में इस तरह की गई गड़बड़ी का यह प्रदेश का पहला मामला है। पुलिस जांच के बाद ही पता चल सकेगा कि इस मामले में और भी इस तरह के स्टांप पेपर का उपयोग हुआ है या नहीं। उन्होंने बताया कि इस तरह के मामलों में कड़ी कार्रवाई की जाएगी। श्री भदौरिया ने बताया कि धारा 69 के तहत इस मामले में कार्रवाई की जाएगी। इसमें यदि कोई सर्विस प्रोवाइडर इस तरह से स्टांप पेपर में छेड़छाड़ करता है तो उसमें 6 माह के कारावास तक की सजा का प्रावधान है।

प्रत्येक स्टांप पेपर का बीस डिजिट का एक नंबर होता है। पहला 500 रुपए का जो स्टांप पेपर निकाला गया उसकी आखरी चार डिजिट का नंबर 7221 था। इसी स्टांप पेपर की जो दूसरी फोटो काॅपी की गई उसमें बीस डिजिट के नंबर 722 कर दिया लेकिन नीचे 7221 ही रह गया। इस तरह से यह स्टांप पेपर अलग ही दिखाई दे रहा था। ऊपर 19 डिजिट और नीचे के कोड में बीस डिजिट थी।

इस तरह की नंबरों से छेड़छाड़
पहला असली स्टांप है, दूसरे चित्र में फोटो काॅपी है जिसमें नंबरों से छेड़छाड़ की गई।

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