हिंदी की वर्तमान दशा चुनौतियांे पर बात
किसीभी राष्ट्र की पहचान उसकी भाषा से होती है। भाषा संप्रेषण का एक माध्यम है। हिन्दी भाषा में यह विशेषता बखूबी रूप से पाई जाती है। जितना अधिक हो सके हमें हमारी राष्ट्रभाषा का उपयोग करना चाहिए। हिंदी भाषा बहुत ही व्यापक है। इसमें कई भाषाओं का समावेश है।
यह बात बुधवार को शासकीय चंद्रशेखर आजाद पीजी कॉलेज में हिंदी सप्ताह के समापन अवसर पर आयोजित परिचर्चा में कॉलेज के प्रभारी प्राचार्य डॉ. एमएस राठौड़ ने कही। पीजी कॉलेज में 10 सितंबर से हिंदी सप्ताह मनाया जा रहा है। हिंदी विभाग और प्रतिभा बैंक के संयुक्त तत्वावधान में अब तक अब तक कॉलेज में निबंध लेखन, वाद-विवाद और परिचर्चा आयोजित की गई। इसी कड़ी में बुधवार को कॉलेज के सभागार में हिंदी सप्ताह के समापन अवसर पर राष्ट्रभाषा हिन्दी : वर्तमान दशा एवं चुनौतियां विषय पर परिचर्चा आयोजित की गई। इस दौरान प्रतिभा बैंक के सदस्य शैलेंद्र तिवारी ने हिंदी की मीडिया के क्षेत्र में अपार संभावनाएं बताईं। सेवानिवृत्त आचार्य वासुदेव मिश्रा ने कहा कि जिस प्रकार संगीत के सात स्वर केवल पूरे देश को बल्कि पूरे विश्व को एकता एवं आनन्द के सूत्र में बांधते हैं, उसी तरह हिन्दी भाषा विभिन्न भाषा और भाषियों के बीच अंतरंग संबंध स्थापित करते हुए एकता के सूत्र में बांधती है।
पुस्तकालय अध्यक्ष एवं रंगकर्मी अजय श्रीवास्तव ने कहा कि हिंदी रंग मंच अभिव्यक्ति का संपूर्ण माध्यम है। हिन्दी भाषा हमारी सांस है। पंकज पुरोहित सुबीर ने हिन्दी की वर्तमान दशा को रेखांकित करते हुए कहा की हिन्दी समृद्ध भाषा हैं हिन्दी में संघर्ष कर तेजस्वी रूप में प्रगट होने की अदभुत क्षमता है। इस मौके पर प्रतियोगिताओं के विजेताओं को भी पुरस्कृत किया गया।
सीहोर. कॉलेज के सभागार में आयोजित कार्यक्रम में छात्र-छात्राएं भी मौजूद थे।