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बेबस : तीन किमी पैदल सफर

7 वर्ष पहले
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भोपाल-इंदौरमार्ग पर चलने वाली अधिकांश बसें सवारियों को चौपाल सागर या सैकड़ाखेड़ी जोड़ पर ही उतार देती हैं। ऐसे में यात्रियों को करीब 3 से 4 किमी दूर पैदल ही चलना पड़ता है। हद तो तब हो जाती है जब रात के समय भी ये बस चालक बस स्टैंड तक सवारी छोड़ने नहीं आते। ऐसे में अंधेरे में करीब 4 किमी का सफर करके यात्री अपने शहर पहुंच पाते हैं। बावजूद इसके ऐसी यात्री बसों के खिलाफ कोई सख्ती नहीं हो पा रही है। इससे लोगों में आक्रोश है। इधर मंडी में भी ओवर ब्रिज निर्माण के चलते बसें परिवर्तित मार्ग से निकलती हैं। इससे पैदल ही इन यात्रियों को अपने निर्धारित स्थान तक पहुंचना पड़ता है।

यात्रियों को बस स्टैंड तक नहीं छोड़ने की समस्या बहुत पुरानी है। परेशान यात्रियों की शिकायत के बाद भी अधिकारी इस पर ध्यान नहीं देते। ऐसे में लोग इन यात्री बसों को अधिकारियों का संरक्षण होने की बात कही कहते हैं। कार्रवाई के अभाव में यात्री बस चालकों के हौंसले और बुलंद होते जा रहे हैं। हर दिन करीब एक दर्जन से अधिक यात्री रात के समय पैदल ही सीहोर तक पहुंचते हैं।

इनमें महिलाएं भी रहती हैं। ऐसे में रात के समय यदि कसी यात्री के साथ कोई वारदात घटित हो जाए तो इसका जिम्मेदार कौन होगा।

80 से अधिक बसें

सीहोरसे होकर हर दिन करीब 80 से अधिक बसें चलती हैं। इनमें सबसे ज्यादा बसें भोपाल-इंदौर की हैं। इसके साथ ही श्यामपुर, शुजालपुर, आगर, शाजापुर, इछावर सहित अन्य क्षेत्रों के लिए भी बसें चलती हैं। कई अन्य गांवों के लिए भी जाती हैं।

^ इंदौर-भोपाल या दो जिलों की सीमा में चलने वाली बसों को संभागीय कार्यालय से परमिट जारी किए जाते हैं। हमारे पास इनका कोई रिकार्ड नहीं रहता। जिन बसों के संचालकों ने परमिट में सीहोर स्टॉप मांगा होगा, वे बसें ही स्टैंड तक आती हैं। प्रदीपकुमार शर्मा, आरटीओ

पीड़ा : यात्रियों की जुबानी

^इंदौर से जब बस में बैठे थे तो बस कंडक्टर ड्रायवर ने कहा था सीहोर बस स्टैंड तक छोड़ देंगे। लेकिन आष्टा आने के बाद अचानक उनके सुर बदल गए। वे कहने लगे की भले यहीं उतर जाओ। हम तो सीधे बायपास से निकल जाएंगे। ऐसे में रात करीब 9.30 बजे सैकड़ा खेड़ी जोड़ पर बस ने उतारा। पैदल-पैदल ही 3 किमी का सफर करके बस स्टैंड पहुंचा। यहां से ऑटो करके घर तक पहुंचा। पंकजविश्वकर्मा, शहरवासी

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