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40 पीठ में सुलझेंगे 30 हजार मामले

7 वर्ष पहले
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जिला न्यायालय में शनिवार को आयोजित होने वाली मेगा लोक अदालत में करीब 30 हजार से अधिक मामले सुलझने की उम्मीद है। जिला मुख्यालय सहित तहसील स्तर पर हजारों प्रकरणों को निपटाने के लिए 40 खंडपीठ का गठन किया गया है। अकेले जिला मुख्यालय पर ही 9 खंडपीठ में मामलों की सुनवाई कर आपसी समझौते से प्रकरणों के निराकरण का प्रयास किया जाएगा।

जिला न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष एएम सक्सेना ने गुरुवार को मेगा लोक अदालत की तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने चर्चा करते हुए बताया कि लोक अदालत के माध्यम से आसानी से लोगों को न्याय दिलाने का प्रयास किया जा रहा है। छोटे-छोटे विवादों में लोग लंबे समय तक परेशान होते रहे हैं। आपसी समझौते से यदि मामलों का निपटारा होता है तो दोनों पक्षों को राहत मिलेगी।

श्री सक्सेना के अनुसार मोटर दुर्घटना से संबंधित प्रकरणों में लगभग एक करोड़ रुपए के मामलों में समझौते की रजामंदी हो चुकी है। लोक अदालत में बीमा कंपनियों द्वारा पक्षकारों के मुआवजा राशि के चेक भी दिए जाएंगे।

लोक अदालत में करीब 12 हजार न्यायालयीन प्रकरण रखे जाएंगे। लोक अदालत में अन्य इच्छुक पक्षकार भी 13 दिसंबर तक राजीनामा योग्य अपने मामले शामिल कर सकते हैं। इसके लिए जिला न्यायालय में सूचना केंद्र भी स्थापित किया जाएगा।

उल्लेखनीय है कि लोक अदालत में अधिक से अधिक प्रकरणों का निराकरण हो इसके लिए नगर पालिका, बिजली कंपनी, बैंक अधिकारी सहित अन्य विभागों के अधिकारी भी जुटे हैं ताकि लंबित मामलों का निराकरण हो सके।

पक्षकारों को यह लाभ

जिलाविधिक सेवा प्राधिकरण के रजिस्ट्रार अयाज मोहम्मद ने बताया कि लोक अदालत में निराकृत सिविल प्रकरणों में अदा की गई कोर्ट फीस वापस लौटा दी जाती है। राजीनामा करने के लिए विद्युत कंपनी नगरपालिका, बैंकों दूरसंचार कंपनियों द्वारा लोगों को विशेष आर्थिक छूट भी दी जाती हैं। लोक अदालत में समरी प्रकरणों को स्वीकार भी किया जा सकता है। आपसी सुलस से निपटने वाले प्रकरणों में मन-मुटाव भी खत्म होता है।

30 हजार से अधिक मामले शामिल

लोकअदालत में करीब 30 हजार से अधिक मामले शामिल किए गए हैं। इनमें करीब 7 हजार 500 न्यायालयीन प्रकरण, 5 हजार 643 राजस्व संबंधी मामले, 1 हजार 570 बैंकिंग प्रकरण, 12 हजार 655 बिजली कंपनी के प्रकरण तथा 2 हजार 500 अन्य प्रकरण शामिल होन