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पीले पड़ने लगे गेहूं के पौधे

7 वर्ष पहले
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समस्या : कम बारिश के कारण बनी स्थिति

इन दिनों किसान गेहूं में रोग लगने की समस्या से परेशान हैं। अधिकांश जगह खेतों में गेहूं के पौधे पीले पड़ने लगे हैं। इससे किसानों की समस्या बढ़ गई है। किसान इस बीमारी से निपटने के लिए कई तरह के जतन कर रहे हैं लेकिन वे बेअसर साबित हो रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि इस बार मानसून की बेरुखी से फसलों की स्थिति पहले ही बिगड़ गई थी। इसके बाद अब गेहूं के पौधे पीले पड़ने की समस्या लोगों के लिए मुसीबत बन गई है। हालांकि मौसम के जानकारों का कहना है कि यह स्थिति पानी की कमी के कारण हुई है। मौसम विशेषज्ञ आरएके कृषि महाविद्यालय के पर्यवेक्षक डॉ. एसएस तोमर ने बताया कि इस बार बारिश अपेक्षाकृत कम हुई है। इस कारण गेहूं की फसल में यह समस्या दिखाई दे रही है। क्लोरोफिन की कमी के कारण यह पौधे पीले पड़ जाते हैं। लेकिन यदि पौधे प्रशासन संश्लेषण की क्रिया सही तरह से करते हैं तो पौधों की यह समस्या कम हो सकती है।

पौधेरह गए छोटे : किसानोंके अनुसार इस बार गेहूं के पौधे अपेक्षाकृत छोटे रह गए हैं। इसके लिए कोई मौसम को तो कोई पानी की कमी को जिम्मेदार मार रहा है। इस साल ठंड भी पिछले साल की अपेक्षा कम रही। इस वजह से भी पौधे ग्रोथ नहीं कर पाए हैं। हालांकि पिछले 3-4 दिनों से मौसम में ठंडक हुई है, इससे फसलों की सेहत में सुधार हो सकता है।

बीमारीभी है वजह : डॉ.तोमर ने बताया कि यदि खेत में कहीं-कहीं गेहूं के पौधे पीले नजर आते हैं तो यह दीमक का असर माना जाता है। इसके साथ ही यदि खेत में कहीं-कहीं निश्चित क्षेत्र में पौधे पीले पड़ रहे हैं तो यह जड़माऊ बीमारी है।

यह है उपचार

डॉ.तोमर ने किसानों को समझाईश देते हुए बताया कि ऐसी स्थिति में खेतों में क्लोरोपायरीफास या फीनलफास का छिड़काव किया जाना चाहिए। यह केमिकल करीब 500 से 600 लीटर पानी में प्रति लीटर एक हेक्टेयर के मान से छिड़काव किया जाए। इसके बाद खेतों में सिंचाई की जाए। इसके साथ ही ये केमिकल करीब एक क्विंटल रेत में मिलाकर भुरकाव किया जाए। इसके बाद हल्की सिंचाई की जाए तो यह बीमारी दूर हो सकती है।

सीहोर. गेहूं के पौधे जड़ से पीले होने लगे हैं, साथ ही ग्रोथ भी कम हुई है।