स्वाइन फ्लू ने उड़ाई विभाग की नींद
बीमारी से संक्रमित लोग यह नहीं करें
}लोगों से हाथ नहीं मिलाएं।
} संक्रमण के संभावित तरीकों से दूर रहें।
} सार्वजनिक स्थानों पर ऐसे लोगों को थूकना नहीं चाहिए।
} बीमारी को नजर अंदाज नहीं करना चाहिए।
} बिना डॉक्टर की सलाह के दवा नहीं लें।
कार्यालय संवाददाता | सीहोर
इंदौर, भोपाल के अस्पतालों में स्वाइन फ्लू के मरीज पहुंचने और कुछ मरीजों की मौत के बाद जिले में भी इसको लेकर दहशत है। सोमवार को भोपाल में फिर से एक संदिग्ध मरीज की मौत से स्वास्थ विभाग की भी नींद उड़ गई है। हालांकि स्वास्थ विभाग का दावा है कि स्वाइन फ्लू से बचाव के इंतजाम किए गए हैं। जन-जागरुकता रैली भी निकाली जा रही हैं।
स्वास्थ्य विभाग अफसर स्वाइन फ्लू के इलाज के लिए पर्याप्त संसाधन होने की बात कह रहे हैं। लेकिन मरीज सामने आने पर यहां इलाज के बजाय उसे इंदौर रैफर कर दिया जाता है। फिलहाल विभाग ने सिर्फ लोगों को जागरूक करने की योजना बनाई है।
हालांकि अभी जिले में स्वाइन फ्लू का कोई मरीज नहीं मिला है। लेकिन इंदौर-भोपाल जैसे बड़े शहरों में मरीज मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग तैयारी में जुट गया है। मरीज के इलाज के लिए ऑक्सीजन के साथ ही विशेष किट की जरूरत होती है। मरीज को अस्पताल में अन्य मरीजों से अलग रखा जाता है।
ऐसे फैलता है स्वाइन फ्लू
स्वाइन फ्लू एच-1 एन-1 इन्फ्लूएंजा वायरस से होता है। यह वायरस खांसने, छींकने, संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से फैलता है। इसे ड्रॉप-लेट इंफेक्शन कहते हैं। संक्रमण के एक से सात दिन बाद इसके लक्षण दिखाई देते हैं।
यह हैं बीमारी के लक्षण
बुखार आना, कफ होना, गले में सूजन आना, नाक बहना, सांस लेने में तकलीफ होना, एच-1 एन-1 स्वाइन फ्लू के लक्षण हो सकते हैं।
स्वाइनफ्लू से बचने के लिए यह करें : स्वाइनफ्लू का इलाज टेमी फ्लू टेबलेट से संभव है। इससे घबराए नहीं। सावधानी बरतें। मुंह नाक को कपड़े से ढंककर रखें। खांसने वाले व्यक्ति से दूर रहें। भीड़ वाले स्थानों से बचें। हाथों की साबुन से साफ करना। मुंह, नाक, कान को बार-बार नहीं छूना। संतुलित और पौष्टिक भोजन करना। लक्षण सामने आने पर तुरंत डॉक्टर से इलाज कराना।