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अब निजी कॉलेज खोलना मुश्किल

6 वर्ष पहले
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स्कूलोंकी तर्ज पर शहर के बाद अब ग्रामीण क्षेत्र में निजी कॉलेज खोलना मुश्किल हो गया है। उच्च शिक्षा विभाग द्वारा नवीन कॉलेज खोलने के लिए जारी की गई गाइड लाइन में अब ग्रामीण क्षेत्र में नया कॉलेज खोलना मुश्किल साबित होगा।

उच्च शिक्षा विभाग द्वारा जारी गाइड लाइन के अनुसार यदि ग्रामीण क्षेत्र में 20 किमी की परिधि में कोई भी निजी कॉलेज है तो यहां नवीन निजी कॉलेज खोलने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

नवीन कॉलेज खोलने के लिए इस बार दस्तावेजों के साथ-साथ कलेक्टर अथवा राजस्व अधिकारी का प्रमाण-पत्र भी सम्मिलित करना पड़ेगा। इसके साथ ही यदि कोई समिति ग्रामीण क्षेत्र में नवीन कॉलेज खोलना चाहती है तो समिति को पंचायत के सक्षम अधिकारी का भी प्रमाण-पत्र शामिल करना होगा।

नएनियमों के तहत 50 फीसदी सीटों पर प्रवेश जरूरी

नवीनकॉलेज खोलने के साथ-साथ इस बार उच्च शिक्षा विभाग ने निजी कॉलेज में नए पाठ्यक्रम शुरू करने पर भी सख्ती बरती है। यदि किसी निजी कॉलेज में चल रहे पाठ्यक्रम में 50 फीसदी सीटों पर एडमिशन नहीं हुए तो उन्हें नए पाठ्यक्रम शुरू करने की अनुमति नहीं मिलेगी। इसके लिए अग्रणी कॉलेज के प्राचार्य का भी सर्टिफिकेट शामिल करना होगा। इन सभी का ध्यान रखना होगा।

दो माह में प्रोफेसर नहीं रखे तो लगेगा ताला

पूरेमध्य प्रदेश के प्राइवेट कॉलेजों को दो महीने में प्रोफेसर रखने के लिए अंतिम बार अल्टीमेटम दिया है। पिछले दिनों वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से संयुक्त संचालक सुधा बैस ने रजिस्ट्रारों से चेतावनी देते हुए कहा कि दो माह के अंदर जो कॉलेज प्रोफेसर की नियुक्त नहीं करते उन्हें संबद्धता देने के बजाय उनमें ताले डलवा दिए जाएं। उच्च शिक्षा विभाग ने यह सख्ती इसलिए भी की है क्योंकि निजी कॉलेजों में यूनिवर्सिटी परिनियम 28/17 के तहत प्रोफेसरों की नियुक्तियां नहीं होने के मामले में हाईकोर्ट में एक याचिका लगी हुई है। इस मामले में कोर्ट ने राज्य शासन से जवाब मांगा था। कोर्ट की ओर से कड़ा रूख अपनाए जाने के कारण उच्च शिक्षा विभाग ने निजी कॉलेजों में शिक्षकों की नियुक्तियों को लेकर गंभीरता दिखाई है।

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