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बिना इलाज कराए लौटे बच्चे

7 वर्ष पहले
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{जांच के बाद इलाज के लिए भेजा था अस्पताल, लेकिन नहीं हुआ इलाज

{ मोबाइल हेल्थ टीम ने किया था बच्चों का परीक्षण

कार्यालयसंवाददाता | आष्टा

राष्ट्रीयबाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत आयुष डॉक्टरों की मोबाइल हेल्थ टीम गांव अरनिया राम के शासकीय उमावि में पहुंची थी। टीम ने स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों की जांच कर बीमारी से ग्रस्त मिलने पर रोग विशेषज्ञ से उपचार के लिए सिविल अस्पताल आष्टा तथा सीहोर रेफर किया था। जब शुक्रवार को पालक शिक्षक बच्चों को अस्पताल पहुंचे तो उन्हें जांच करने वाले डॉक्टर ही नहीं मिले। इससे बिना उपचार कराए ही वापस लौटना पड़ा।

अरनिया राम के शासकीय हायर सेकंडरी स्कूल में गुरुवार को राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत आयुष डॉक्टरों की मोबाइल हेल्थ टीम जांच करने पहुंची थी। यहां पर मोबाइल हेल्थ टीम ने करीब 250 बच्चों की जांच की थी। टीम ने यहां बच्चों की जांच की तथा जो बच्चे बीमारी से ग्रस्त थे उसे सर्टिफिकेट पर्ची देकर उपचार के लिए दूसरे दिन शुक्रवार को सुबह 10.30 बजे सिविल अस्पताल बुलाया गया था। वहीं कुछ बच्चों को गंभीर बीमारी होने से उन्हें सीहोर अस्पताल जाने की बात कही गई थी। इस प्रकार के बच्चों की संख्या मोबाइल हेल्थ टीम से मिली जानकारी के अनुसार करीब 25 से 30 थी। जब बच्चे सुबह सिविल अस्पताल पहुंचे तो उनकी जांच जिन डॉक्टरों ने की थी, वह मौके पर ही नहीं मिले। साथ ही शुक्रवार को अधिकांश डॉक्टर नहीं होने से उन बच्चों के स्वास्थ्य की जांच नहीं हो सकी। जो डॉक्टर वहां मौजूद थे उन्होंने देखने से मना कर दिया। इस कारण बच्चे उनके पालक काफी देर तक अस्पताल में इधर-उधर परेशान होकर घूमते रहे। उसके बाद भी जब डॉक्टरों ने उपचार नहीं किया तो खाली हाथ ही वापस घर लौटकर जाना पड़ा। इससे उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ा।

घंटोंबाद भी नहीं हुआ इलाज

टीमने जांच के दौरान बच्चों को अस्पताल पहुंचने का निर्धारित समय दिया था, उससे पहले ही बच्चे उनके पालक अस्पताल में पहुंच गए थे। इस दौरान उन्होंने डॉक्टरों को अस्पताल में तलाशा भी, लेकिन नहीं मिले। स्कूल के छात्र धीरज विश्वकर्मा ने बताया कि टीम ने उन्हें जांच के दौरान आंख में खामी बताई थी, उसका वह उपचार कराने आए हैं। वहीं नरेंद्र सिंह ने बताया कि उसके दांत खराब बताए गए श्रीराम को भी दांत खराब होना बताया गया। इसी तरह छ