प्रतिभा पर्व में सामने आई हकीकत
ग्रेड 201
बी ग्रेड 674
सी ग्रेड 409
डी ग्रेड 82
ग्रेड 22
मिडिलस्कूलों की स्थिति
कुलस्कूल 675
ग्रेड 179
बी ग्रेड 355
सी ग्रेड 115
डी ग्रेड 19
ग्रेड 5
आरटीई नियम सरकारी स्कूलों पर भारी
कार्यालयसंवाददाता | सीहोर
शिक्षाका अधिकार अधिनियम के तहत सरकार ने निजी सरकारी स्कूलों को 2015 कर सभी सुविधाएं जुटाने की मोहलत दी है। ऐसे में यही नियम सरकारी स्कूलों पर भारी पडऩे वाले हैं। जिले के ज्यादातर स्कूल असुविधाओं से पटे हैं और सुविधाएं जुटाने के लिए सरकार को करोड़ों रुपए खर्च करने होंगे।
स्कूलों में बचे शेष कार्यों की सूची जरूर बन गई है लेकिन इसे लेकर अंतिम रूपरेखा तैयार नहीं हो पाई है। फिलहाल जिला शिक्षा केंद्र ने जिले के सभी स्कूलों में कागजी खानापूर्ति कर दी है, बजट तय होना बाकी है। बजट नए सत्र में पास होने की उम्मीद है। ऐसे में दो साल में करोड़ों रुपए जुटाना और कार्यों को पूरा करना चुनौती से कम नहीं होगा।
सुविधानहीं होने से बढ़ी परेशानी
}शहर के ज्यादातर स्कूलों में बाउंड्रीवॉल नहीं होने से ये असामाजिक तत्वों का अड्डा बने हुए हैं।
} असामाजिक तत्व स्कूल परिसर में गंदगी करने के साथ ही तोड़-फोड़ कर जाते हैं।
} पशुओं के परिसर में घुसने से गंदगी रहती है और बच्चों की जान को भी खतरा रहता है।
} स्कूलों में सुविधाघर नहीं होने से बच्चों को इधर-उधर जाना पड़ता है।
} स्कूल से आए दिन छोटा-मोटा सामान चोरी होने का भय बना रहता है।
} स्टाफ बच्चों को साइकिल रखने में परेशानी होती है।
{ प्राइमरी और मिडिल स्कूलों में बिगड़ रहा पढ़ाई का स्तर
{ ग्रेड में भी शामिल हैं कई स्कूल
विवेकदोहरे | सीहोर
पिछलेदिनों प्राइमरी और मिडिल स्कूल में आयोजित प्रतिभा पर्व ने स्कूलों में गुणवत्ता और शैक्षणिक स्तर की पोल खोल कर रख दी है। स्थिति यह है कि 1398 प्राइमरी स्कूल में से सिर्फ 201 स्कूल ही ग्रेड में आए हैं। मिडिल स्कूलों की भी स्थिति कुछ ऐसी ही है। जिले में कुल 675 मिडिल स्कूलों में सिर्फ 179 स्कूल ही ग्रेड के मापदंडों पर खरे उतर सके। शेष सभी स्कूलों में गुणवत्ता प्रभावित मिली।
प्राइमरी और मिडिल स्कूलों में अर्द्धवार्षिक परीक्षा के स्थान पर अब प्रतिभा पर्व मनाया जाता है। इस प्रतिभा पर्व में शिक्षा विभाग के अतिरिक्त अन्य विभाग के अधिकारी और जनप्रतिनिधि स्कूलों की मॉनिटरिंग कर निर्धारित बिंदुओं के आधार पर स्कूल में शैक्षणिक एवं अन्य व्यवस्थाओं का मूल्यांकन करते हैं। पिछले दिनों भी जिले के स्कूलों में प्रतिभा पर्व मनाया गया। इस प्रतिभा पर्व में हुए मूल्यांकन में जो हकीकत स्कूलों की सामने आई है वह चौकाने वाली है।
पूरे जिले में मात्र 26 फीसदी मिडिल स्कूल ही ग्रेड में आए हैं। वहीं प्राइमरी स्कूल की हालत और ज्यादा खराब मिली। ग्रेड के लिए निर्धारित मानक सिर्फ 14 फीसदी स्कूल ही पूरे कर सके। शेष स्कूल बी और सी ग्रेड में रहे। यही नहीं प्राइमरी और मिडिल स्कूलों में डी और ग्रेड में भी कई संस्थाएं आई हैं। इससे इन स्कूलों में शिक्षा और व्यवस्थाओं की पोल खुलती नजर रही है। परिणाम आने के बाद शिक्षा विभाग अब परिणामों की समीक्षा में जुट गया है। पिछले दिनों सीहोर ब्लाक में हुई समीक्षा बैठक में जहां डी और ग्रेड के स्कूल जनशिक्षक और अन्य शिक्षकों को गोद देने का निर्णय लिया गया। वहीं अन्य ब्लाक में भी अब परिणामों की समीक्षा की जा रही है।
यहदेखा जाता है प्रतिभा पर्व में
स्कूलोंमें शैक्षणिक स्तर और प्रगति का मूल्यांकन, बच्चों की शैक्षणिक व्यवस्थाओं के प्रति समाज को जागृत करना, चिन्हित कमजोर बच्चों के लिए सुधार कार्यक्रम तैयार करना, शिक्षा के प्रति शिक्षकों, प्रशासनिक अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी सुनिश्चित करना, स्कूलों में शैक्षणिक स्तर और सुविधाओं की सही स्थिति का मूल्यांकन, स्कूलों में साफ-सफाई एवं अन्य व्यवस्था का मूल्यांकन
इनकाहोता है मूल्यांकन
स्कूलमें शैक्षणिक व्यवस्थाओं का मूल्यांकन, प्रार्थना सभा की स्थिति, स्कूल के परिवेश और बच्चों के स्वास्थ्य स्वच्छता का मूल्यांकन, स्कूलों में राष्ट्रीय पर्वों के आयोजन की स्थिति की जांच, बच्चों में सामान्य ज्ञान का भी होगा मूल्यांकन, स्कूल स्तर पर दस्तावेजों की जांच भी की जाती है।
ग्रेडका निर्धारण : ग्रेडके लिए 80 फीसदी से अधिक अंक, बी ग्रेड के लिए 60 से 79 फीसदी, सी ग्रेड के लिए 45 से 59 फीसदी अंक, डी ग्रेड के लिए 33 से 44 फीसदी अंक और ग्रेड 33 फीसदी से कम अंक वाले स्कूलों को दिया जाता है।
^सभीब्लाक में प्रतिभा पर्व में सामने आए परिणामों की समीक्षा की जा रही है। इसके बाद परिणाम सुधारने के लिए विशेष पहल भी की जाएगी। इससे परिणाम सुधर सकेंगे। अशोकपराडकर, डीपीसी