- Hindi News
- मंदिर के लिए ही सौंप देते हैं पं. शर्मा अपना मानदेय
मंदिर के लिए ही सौंप देते हैं पं. शर्मा अपना मानदेय
एक्सक्लूसिव
टंकीचौराहा स्थित शिर्डी के श्री सांईनाथ मंदिर के पुजारी पं. महेश शर्मा (45) की पहल मंदिर से जुड़े कार्यों में उपयोगी हो रही है। सुबह-शाम सांई की सेवा के बदले मंदिर समिति से प्रतिमाह मिलने वाले 900 रु. मानदेय को वह मंदिर समिति को सौंप देते हैं। ताकि उस राशि का उनकी भावनानुरूप मंदिर से जुड़े कार्यों में उपयोग हो सके। प्रतिदिन मंदिर में घंटों अपनी सेवाएं देना भी वे नहीं भूलते। आगे भी मंदिर में नि:शुल्क सेवा देने का बीड़ा भी वे उठा चुके हैं।
पिछले डेढ़ साल से ज्यादा समय से पं. शर्मा श्री सांईनाथ के मंदिर में पुजारी के रूप में नि:शुल्क सेवाएं देते रहे हैं। बाबा की सेवा का सिलसिला सतत जारी है। पं. शर्मा ने बताया उन्होंने वर्ष 1992 से टंकी चौराहा के श्री सांईनाथ मंदिर में पुजारी के रूप में सेवाएं देना शुरू की थी। उस समय समिति से 200 रु. प्रतिमाह मानदेय तय था। अब बीते डेढ़ साल से ज्यादा समय से मंदिर में नि:शुल्क रूप से सेवाकार्य करते रहे हैं। समिति समय-समय पर होने वाले मंदिर संबंधी कामकाजों में पुजारी द्वारा स्वेच्छा से भेंट की जा रही इस राशि का उपयोग भी करती है। पं. शर्मा मानदेय की करीब 20 हजार रु. की राशि अब तक बाबा के चरणों में भेंट कर चुके हैं।
प्रतिदिन8 घंटे से ज्यादा मंदिर में देते हैं सेवा- पं.शर्मा ने बताया सुबह 9 से दोपहर 12 बजे तक शाम 5 से रात 10.30 बजे तक का समय वे मंदिर में सेवाकार्य के लिए देते हैं। इस दौरान बाबा की प्रतिमा का पूजन, अभिषेक, शृंगार, गर्भगृह की साफ-सफाई, आरती, प्रसाद वितरण करते हैं। मंदिर स्थापना दिवस विशेष धार्मिक दिवसों पर पूरा दिन ही सांई की सेवा में बीत जाता है।
भक्तोंकी आस्था का केंद्र है मंदिर- शहरका यह एकमात्र सांईनाथ मंदिर हजारों सांईनाथ भक्तों की आस्था का केंद्र है। वर्ष 1989 के बाद नए मंदिर निर्माण से ही आस्था का केंद्र रहा है। अब भी यहां हर गुरुवार को विशेष धार्मिक आयोजनों के साथ रात 8 बजे बाबा की महाआरती की जाती है।
श्री सांईनाथ मंदिर में नि:शुल्क सेवा दे रहे पुजारी पं. महेश शर्मा।
^श्री सांईनाथ मंदिर के पुजारी समर्पण भाव से मंदिर में सेवा करते रहे हैं। बीते डेढ़ साल से वह अपने सेवाकार्य के बदले मिलने वाली मानदेय की राशि समिति को ही सौंप रहे हैं। उक्त राशि का उपयोग भी मंदिर से जुड़े कार्यों के लिए किया जाता है। सम