पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • इंस्पायर अवार्ड प्रदर्शनी से नदारद रहने वालों पर नहीं सख्त कार्रवाई लाखोंकी राशि वापस लेने के

इंस्पायर अवार्ड प्रदर्शनी से नदारद रहने वालों पर नहीं सख्त कार्रवाई लाखोंकी राशि वापस लेने के लिए सिर्फ शोकाज नोटिस का सहारा

7 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
{ सख्त कार्रवाई के लिए वरिष्ठ कार्यालय से निर्देश का इंतजार {इसी तरह समय बीतता रहा तो लाखों रु. का फटका लगेगा

भास्करसंवाददाता | शाजापुर

उत्कृष्टविद्यालय में 19 से 21 अगस्त तक आयोजित हुई जिलास्तरीय इंस्पायर अवार्ड विज्ञान प्रदर्शनी से नदारद रहने वालों पर जिम्मेदार सख्त कार्रवाई नहीं कर पाए। अनुपस्थित रहने वाले विद्यार्थियों की संस्थाओं को आयोजन खत्म होने के कुछ दिनों बाद महज शोकाज नोटिस ही भेजा गया। लापरवाहों के जवाब भी डीईओ कार्यालय तक नहीं पहुंचे हैं।

प्रदर्शनी में मॉडल बनाकर लाने आदि कार्यों के लिए जारी की गई राशि अनुपस्थित रहे विद्यार्थियों से वापस लेने के लिए वरिष्ठ कार्यालय से भी अब तक सख्त कार्रवाई के संबंध में कोई निर्देश नहीं मिले हैं। शोकाज नोटिस का जवाब समय पर नहीं मिल रहा, साथ ही वरिष्ठों से निर्देश भी। समय बीतता जा रहा है, वह अलग। ऐसे में क्या जिम्मेदार इन सैकड़ों बच्चों को जारी की गई लाखों रु. की राशि वापस लेने में कारगर हो पाएंगे, कहना मुश्किल है। जिलास्तरीय इंस्पायर अवार्ड प्रदर्शनी के लिए इस बार शासन की योजनानुसार 5-5 हजार रु. प्रत्येक विद्यार्थी के मान से 682 पंजीकृत विद्यार्थियों को राशि जारी की गई थी। प्रदर्शनी के दूसरे दिन भी पंजीयन का मौका दिए जाने पर 225 से ज्यादा विद्यार्थी नहीं पहुंचे थे। 457 विद्यार्थी प्रदर्शनी से नदारद रहे थे। इन विद्यार्थियों को जारी की गई कुल 22 लाख 85 हजार रु. की राशि का कोई उपयोग ही नहीं हो पाया। समय रहते इस ओर कोई सख्त कदम नहीं उठाए गए तो शासन को लाखों रु. का चूना लगना तय है।

कार्रवाई नहीं होने पर इन्हें भी नहीं परवाह

इसमसले में जिम्मेदारों द्वारा लापरवाह संस्थाओं पर सख्त कार्रवाई नहीं होने के कारण उन्हें भी कोई परवाह नहीं है। यदि परवाह होती तो वे अपनी संस्था के चयनित बच्चों को प्रदर्शनी में जरूर भेजते। प्रदर्शनी में भेज सके तो समय पर शोकाज नोटिस का जवाब प्रस्तुत करते। लेकिन ऐसा अब तक कुछ नहीं हुआ।

इतनेरुपयों में तो खुल जाती कई विज्ञान की लेब

प्रर्दशनीआयोजन के समय ही कई शिक्षकों ने बच्चों को विज्ञान से जोड़ने के लिए इस औपचारिकता पर तीखे प्रहार कसे थे। यह मंशा जताई थी कि शासन चाहती तो विज्ञान प्रदर्शनी में हर साल खर्च करने वाली लाखों की राशि से कई स्कूलों में विज्ञान की लेब ही खोल देते। लेब बच्चों क