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अिधकािरयों ने मना किया फिर भी पीओपी की छत का िनर्माण जारी

7 वर्ष पहले
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जिलाअस्पताल में इन दिनों मनमर्जी का निर्माण हो रहा है। निर्माण एजेंसी पीडब्ल्यूडी को तो अस्पताल प्रबंधन की परवाह है और ही मरीजों की सुविधा का ख्याल। प्रबंधन से चर्चा किए बगैर ही पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों ने मेल सर्जिकल वार्ड की छत पर नीचे से पीओपी (प्लॉस्टर ऑफ पेरिस) की छत बनाना शुरू कर दी। पीओपी की छत को लेकर पिछले दिनों अस्पताल प्रबंधन ने भी ऐतराज जताया और विधायक ने भी जिम्मेदार अधिकारियों को पीओपी की छत के बजाए प्रबंधन के मुताबिक निर्माण कराने की बात कही, लेकिन ठेकेदार के नुकसान का हवाला देते हुए संबंधितों ने काम बंद नहीं किया।

पिछले दिनों अस्पताल के औचक निरीक्षण के दौरान विधायक अरुण भीमावद को भी अस्पताल प्रबंधन ने उक्त निर्माण के प्रति ऐतराज जताते हुए पीओपी की छत का निर्माण बंद कराने को कहा था। विधायक ने भी मौजूद अधिकारियों को प्रबंधन के कहे मुताबिक ही निर्माण कराने के निर्देश दिए। बावजूद जिम्मेदारों ने ऐसा नहीं किया। पीओपी की छत बनाने के लिए चल रहे काम को ठेकेदार ने अब भी जारी रखा। मामले में अधिकारी जो तर्क दे रहे हैं, वह हास्यास्पद है। अधिकारियों के मुताबिक पीओपी की छत बनाने के लिए ठेकेदार ने काफी काम कर दिया। यदि अब उसे निरस्त करें तो ठेकेदार को काफी नुकसान होगा। यानी जिम्मेदारों को ठेकेदार के नुकसान की चिंता है। मरीजों की सुविधा से उन्हें कोई लेना-देना नहीं है।

पीओपीकी छत से हादसे का खतरा- पीओपीकी छत से अस्पताल में हादसे का खतरा बना रहेगा, क्योंकि सालों पहले बने जिला अस्पताल की छत पुराने तरीके से बनी है। यहां बारिश के समय पानी टपकता है। ऐसे में टपकती छत के नीचे पीओपी लगा होने से यह छत कभी भी क्षतिग्रस्त हो सकती है और किसी को भी नुकसान पहुंचा सकती है।

गहनचिकित्सा वार्ड की छत क्षतिग्रस्त हो चुकी है- अस्पतालमें दो साल पहले बने गहन चिकित्सा वार्ड में पीओपी की छत लगाई थी। एक साल बाद ही उक्त पीओपी की छत ने जवाब दे दिया और पिछले साल बारिश के सीजन में पीओपी की छत क्षतिग्रस्त होकर गिर गई। गनीमत रही कि उस समय उक्त स्थान पर वहां कोई मौजूद नहीं था।

यहभी खतरा- पीओपीकी छत के कारण एक खतरा और भी होता है। मुख्य छत और पीओपी की छत के बीच कुछ जगह खाली होती है। इस खाली जगह में चूहे अन्य जानवर भी पहुंच जाते हैं। ऐसे में वार्ड में भर्ती मरीजों के लिए यह किसी बड़े खतरे