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नए नियम से व्यापारी नाखुश, दुकानें बंद रखी

5 वर्ष पहले
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कीटनाशक व उर्वरक संशोधन नियमों के तहत खाद-बीज की दुकान लगाने के लिए बीएससी कृषि की डिग्री की अनिवार्यता के विरोध में मंगलवार को व्यापारियों ने अपनी दुकानें बंद रखी। पहले से दुकान संचालित करने वाले व्यापारियों को जिम्मेदारों ने ऐसी डिग्री या डिप्लोमा करने के लिए दो साल की छूट दी है। इसी को लेकर खाद-बीज व्यापारी संघ सदस्यों ने अधिकारियों को ज्ञापन देकर उक्त परिवर्तित नियम वापस लेने की मांग की। व्यापािरयों ने कहा दो साल में कृषि संबंधी डिग्री हम कहां से ला सकते हैं? विरोधस्वरूप जिलेभर की कीटनाशक की करीब 400 दुकानें बंद रहीं।

विरोध के चलते सुबह करीब 11.30 बजे कलेक्टोरेट पहुंचकर व्यापारियों ने कलेक्टर राजीव शर्मा के नाम संबोधित ज्ञापन नायब तहसीलदार वीरेंद्र पौराणिक और एस.एल. शाक्य को सौंपा। जिला मुख्यालय पर हुए विरोध प्रदर्शन में 45 व्यापारियों सहित जिले के करीब 400 व्यापारियों ने दुकानें बंद रखी। विरोध के बाद तहसील व जिला मुख्यालयों पर कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपा गया। इसमें व्यापारियों ने नए नियम का खुलकर विरोध जताते हुए बताया कि दुकान चलाने वालों के लिए डिग्री की अनिवार्यता करना बिलकुल गलत है। सरकार प्रदेश में नकली खाद-बीज बनाने वालाें को तो रोक नहीं पा रही है। वहां ध्यान देने के बजाय सरकार व्यापारियों को परेशान करने लगी है। यदि ऐसा होगा तो कई व्यापारियों की रोजी-रोटी बंद हो जाएगी।

आंदोलन की चेतावनी- नए नियम के विरोध में पूरे प्रदेश सीड्स एंड फर्टिलाइजर संघ ने मंगलवार को उन्होंने अपने प्रतिष्ठान बंद रख विरोध जताया। संघ सचिव ने बताया कि नियमों में संशोधन से सबसे अधिक मार पुराने विक्रेताओं पर पड़ेगी। ऐसे में सरकार को नियम लागू करने से पूर्व इसकी व्यावहारिकता देख लेनी चाहिए थी। यदि नियमों को जबरन लागू किया गया तो सभी विक्रेता बेमियादी हड़ताल करेंगे।

नकली बनाने वालों पर ध्यान देने की जरूरत- व्यापारियों पर सख्ती करने के बजाय सरकार को प्रदेश और देश में नकली खाद-बीज और कीटनाशक बनाने वाली कपंनियों पर सख्ती करने की जरूरत है। यदि इस तरह के नकली व कम गुणवत्ता वाले खाद-बीज और कीटनाशक ही बाजार में नहीं आएंगे तो दुकानें से बेचे जाने का सवाल की खत्म हो जाएगा।

नायब तहसीलदार व तहसीलदार को ज्ञापन सौंपते हुए।

दो साल की छूट पर दिया तर्क
संघ के जिलाध्यक्ष संजय नारोलिया व सचिव रामचंद्र पाटीदार ने बताया कि नए प्रावधान के मुताबिक कृषि संबंधी डिग्री या डिप्लोमा करने के लिए सरकार ने व्यापारियों को दो साल का समय देने की बात कही है। जो व्यापारियों के गले नहीं उतर रही है। क्योंकि कृषि में चार साल में स्नातक डिग्री होती है। डिप्लोमा के लिए भी उन्हें बड़े शहरों का रुख करना पड़ेगा। इतना ही नहीं, दो साल में यह सब कैसे होगा। इसी को लेकर संघ सदस्यों ने अधिकारियों को ध्यान आकर्षिक कर नियम में शिथिलता करने की मांग की है।

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