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गड़बड़ी की आशंका, भुगतान की राशि रोकी

7 वर्ष पहले
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भासं. सुसनेर| अनिवार्यशिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत 25 प्रतिशत बच्चों को नि:शुल्क एडमिशन देने के मामले में गड़बड़ी की आंशका के चलते सत्र 2013-14 की राशि जिला कार्यालय शाजापुर में प्राप्त होने के चार माह बाद भी शाजापुर और आगर जिले के करीब 540 स्कूलों में वितरित नहीं हो पाई है। यह राशि छोटी-मोटी नहीं बल्कि करीब 5 करोड़ है। इस राशि पर मिल रहा ब्याज किसके हिस्से आएगा, यह भी एक बड़ा सवाल है।

राशि जिला कार्यालय पहुंच चुकी है। इस बात का खुलासा नगर के एक स्कूल संचालक द्वारा मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में की गई शिकायत के बाद हुआ है। नगर के एक निजी स्कूल संचालक ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर शिकायत क्रं.-216748 दर्ज कराकर वर्ष 2013-14 के नि:शुल्क एडमिशन की राशि नहीं मिलने की शिकायत की थी। हेल्पलाइन पर शिकायत के बाद हुई छानबीन के बाद शिकायतकर्ता को जवाब मिला कि चार माह पहले ही राशि डीपीसी कार्यालय शाजापुर में जमा कराई जा चुकी है। नियमों के अनुसार जिन निजी स्कूलों ने अपने यहां नि:शुल्क एडमिशन की जानकारी समय पर शिक्षा विभाग को दे दी थी, उनके नि:शुल्क एडमिशन की राशि उनके खातों में अप्रैल-2014 में जमा हो जानी चाहिए थी जो अभी तक शाजापुर और आगर जिले के किसी भी निजी स्कूल में जमा नहीं हुई है।

बच्चोंकी संख्या में गड़बड़ी की आशंका-अधिनियम केतहत स्कूलों ने नि:शुल्क एडमिशन देने में गड़बड़ी की है। शाजापुर-आगर जिलों में संचालित कई निजी स्कूलों ने 50-50 छात्रों को नि:शुल्क पहली कक्षा में एडमिशन देने की जानकारी विभाग को भेजी है। जानकारी मिलने के बाद डीपीसी अक्षय सिंह राठौड़ ने ऐसे स्कूलों का वेरिफिकेशन कर वास्तविक स्थिति का पता लगाने के निर्देश अधीनस्थों को दिए हैं।

^राशि तो मिली है, लेकिन शाजापुर और आगर जिले के किसी भी निजी स्कूल को नहीं दी गई है। कई स्कूलों ने अपने यहां 50-50 बच्चों को नि:शुल्क एडमिशन दिए जाने की जानकारी दी है जो संदेहास्पद है। इसलिए इन स्कूलों का वेरिफिकेशन किए जाने के निर्देश दिए गए हैं। वेरिफिकेशन में सत्यता पाई जाने के बाद राशि जारी की जाएगी। 540 स्कूलों की जांच में समय तो लगता है। अक्षयसिंह राठौड़, डीपीसी,शाजापुर

मामला शिक्षा का अिधकार अधिनियम के तहत नि:शुल्क प्रवेश का