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ओटी के बाहर सोते हैं अटेंडर

7 वर्ष पहले
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जिसकी मर्जी हो अस्पताल में जाकर सो जाते हैं

भास्करसंवाददाता| शाजापुर

जिलाअस्पताल में मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं से लेकर अटेंडर और सुरक्षा की सारी व्यवस्था ध्वस्त चल रही है। अटेंडरों को रात्रि विश्राम करने के लिए अस्पताल के समीप धर्मशाला बनी है। लेकिन इसे अस्पताल प्रबंधन ने स्टोर रूम बना डाला। धर्मशाला में दवाई के बॉक्स और अन्य सामान पड़ा है। ऐसे में अटेंडरों को अस्पताल के गलियारे और ऑपरेशन थियेटर के बाहर ही रात गुजारना पड़ती है।

सालों से बंद पड़ी धर्मशाला पर किसी का ध्यान नहीं है। मरीजों से साथ आने वाले अटेंडरों को इसकी जानकारी नहीं दी जाती। यही वजह है अटेंडरों को अस्पताल परिसरों में ही रात गुजारना पड़ती है। इधर, अस्पताल प्रबंधन ने अटेंडरों की सुविधा के लिए बनी गांधी धर्मशाला को स्टोर रूम बना लिया है। अटेंडरों के रात्रि विश्राम कराने के बजाए संबंधितों ने यहां दवाई के बक्से और अन्य सामान रख दिया। इस कारण अटेंडरों को परेशानी झेलना पड़ती है। आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को अस्पताल परिसर में रात गुजारना पड़ती है। कुछ लोग धर्मशाला और लॉज में जाकर रात बिताते हैं। अस्पताल की पूरी व्यवस्था ध्वस्त पड़ी है। अस्पताल परिसर में जिसे जहां जगह मिले वे वहां सो जाते हैं। अव्यवस्थित तरीके से सोने वाले लोगों के कारण परिसर में अव्यवस्था फैल जाती है।

10-20रुपए किराया -गांधी धर्मशालामें रहने के लिए बिस्तर और पलंग की व्यवस्था के साथ अन्य सुविधाएं भी हैं। इसके लिए अटेंडरों का 10-20 रुपए न्यूनतम किराया लगता है। लेकिन प्रबंधन की लापरवाही के चलते अटेंडरों को इसका लाभ नहीं मिल पाता।

स्टोररूम बना दी धर्मशाला -अटेंडरों कीसुविधा के लिए तैयार धर्मशाला को अस्पताल प्रबंधन ने स्टोर रूप के काम लेना शुरू कर दिया है। कमरों में दिखावे के लिए दो-चार पलंग रखे हैं। लेकिन शेष जगह में दवाई के बॉक्स और अन्य सामान रखा है।

सीएसको नहीं अस्पताल की परवाह -अस्पताल कीव्यवस्था संभालने के लिए सिविल सर्जन के पद पर बैठे डॉ. बी.एस. मैना को अस्पताल की व्यवस्थाओं से कोई लेना देना नहीं है। यही वजह है कि उन्हें तो अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था की जानकारी हैं और ही मरीज अटेंडरों की सुविधा की।

^अस्पताल में प्रवेश करने वालों से पूछताछ करने के लिए सिक्यूरिटी गार्ड है। रही बात धर्मशाला को स्टोर रूम बनाने की तो कम