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कॉलेजों को भारी पड़ रही 1600 डिग्रियों की रखवाली
शुल्क जमा करने के बावजूद विद्यार्थी नहीं ले गए डिग्रियां
भास्करसंवाददाता|शाजापुर
सरकारीकॉलेजों में उच्च शिक्षा पा चुके हजारों पूर्व विद्यार्थियों के हाथ उनकी पढ़ाई के प्रमाण के रूप में सहेजी जाने वाली डिग्री से दूर हैं। नतीजतन शाजापुर, आगर-मालवा जिलों के कई कॉलेजों में आज भी करीब 1600 डिग्रियां धूल खा रही हैं। परीक्षा के समय विक्रम विवि को शुल्क जमा करने के बाद भी कई-कई दिनों में इक्का-दुक्का छात्र-छात्रा ही डिग्री लेने पहुंचते हैं। बाकी के कोई ठिकाने नहीं।
इधर, विवि से सत्र 2006 से 2011 के बीच जारी की गई इन सालों पुरानी डिग्रियों को संभालना भी अब कॉलेज प्रबंधनों के लिए मुश्किलभरा साबित हो रहा है। कई कॉलेजों में तो डिग्री वितरण करने का कामकाज करने वालों को विवि से उनका उचित पारिश्रमिक तक नहीं मिला है। ऐसे में कॉलेजों के ये डिग्री वितरण प्रभारी भी इस अतिरिक्त काम के बोझ को झेलने में बेहतर सक्षमता नहीं दिखा पा रहे। छात्रों का पता भी स्पष्ट नहीं मिल पाने से डिग्रियां लेने की सूचना भेजना तक भी किसी चुनौती से कम नहीं। वर्तमान में जिलों में कुल नौ सरकारी कॉलेज हैं। इनमें से पोलायकलां कॉलेज ही एेसा है जो उक्त समयावधि के बाद खुलने से डिग्री वितरण के काम से अछूता है। आगर पीजी काॅलेज ही ऐसा है, जिसने डिग्रियां वितरण की जिम्मेदारी लेने से मना कर दिया है। शेष सात कॉलेज प्रबंधनों को चाहते हुए भी विक्रम विवि द्वारा थौंपी गई यह जिम्मेदारी मजबूरन निभाना पड़ रही है। वे चुपचाप अपनी रिस्क पर डिग्रियां बांट रहे हैं। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि डिग्रियां यदि गुम हो गई तो जिम्मेदार कौन होगा। विक्रम विवि प्रबंधन, जिसने अपना काम इन कॉलेजों पर थाैंप दिया या कॉलेज प्रबंधन, जो अपना काम नहीं होने के बाद भी सालों पुरानी डिग्रियां सहेजकर उन विद्यार्थियों का इंतजार कर रहे हैं, जिन्हें अपनी डिग्री ले जाने से कोई मतलब नहीं रहा।
लीडकॉलेज में सबसे ज्यादा डिग्रियां- वितरणसे शेष बची सालों पुरानी डिग्रियों के आंकड़ों पर नजर दौड़ाए तो नौ में से छह कॉलेजों को मिलाकर जिलों में अब भी करीब 2016 पूर्व छात्र-छात्राएं अपनी डिग्रियां कॉलेजों से नहीं ले गए हैं। जिले के लीड बीएसएन काॅलेज में सबसे ज्यादा लगभग 1000 डिग्रियां रखी हुई हैं।
विविलेता डिग्री शुल्क, बंटवाता कॉलेजों से- डिग्रीवितरण की प्रक्रिया म