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2623 मी. टन यूरिया की रैक आई, आज बंटेगी

7 वर्ष पहले
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समय पर यूरिया नहीं मिलने से इस बार गेहूं का 50 प्रतिशत तक उत्पादन कम होगा

भास्करसंवाददाता|शाजापुर

काफीहो-हल्ले के बाद आखिरकार सोमवार को जिले को 2623 मी. टन यूरिया की रैक गई। रैक पाइंट पर यूरिया की बोरी खाली कर तत्काल जिले की सोसायटियों में पहुंचा दिया गया। संभवत: मंगलवार को सोसायटियों से खाद का वितरण शुरू कर दिया जाएगा। इधर, रबी फसल की उम्र करीब 35 दिन से ज्यादा की हो चुकी है। अब तक यूरिया नहीं मिला। ऐसे में फसल का सही तरीके से विकास नहीं हो सका। कृषि विशेषज्ञों की मानें तो समय पर गेहूं को यूरिया नहीं मिलने से उत्पादन पर असर पड़ेगा।

सोमवार को रैक आते ही जिम्मेदारों ने रेलवे ट्रैक से सीधे यूरिया से भरी गाड़ियां सोसायटियों की ओर रवाना कर दी। इसी दिन आगर-शाजापुर जिले के सभी सेंटरों पर यूरिया पहुंच गया। इसके बाद मंगलवार को सोसायटियों से खाद का वितरण शुरू हो जाएगा। पिछले डेढ़ माह से यूरिया के लिए आंदोलन कर रहे किसानों को समय पर यूरिया नहीं मिला। गेहूं की फसल को पहले और दूसरे पानी के साथ पर्याप्त यूरिया नहीं मिलने से उत्पादन पर भी गहरा असर पड़ेगा। साथ ही देरी से गेहूं की बोवनी करने वाले किसानों के लिए पहले और दूसरे पानी के साथ अब मिलने वाला यूरिया काफी लाभकारी साबित होगा।

पहलापानी 21 दिन में

विशेषज्ञोंका कहना है गेहूं फसल में पहला पानी 21 दिन में दिया जाता है। ऐसे में अब कई कृषकों की गेहूं की फसल करीब 40-45 दिनों की हो चुकी है। इसमें अब तीसरा पानी देने की तैयारी हो गई है। गेहूं की फसल को दिए जाने वाले पहले पानी के समय पौधे को अधिक आवश्यकता रहती है। इस समय पौधे के तने में गुच्छा बनकर कल्ले निकलने का काम शुरू हो जाता है। इस समय पौधे को सभी पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है। इसी प्रकार दूसरे पानी में भी पौधे को पानी के साथ यूरिया की आवश्यकता होती है। लेकिन इसके बाद गेहूं को दिए जाने वाले पानी के साथ यूरिया की ज्यादा आवश्यकता नहीं लगती है। इस प्रकार जो यूरिया किसानों को 15-20 दिन पहले मिलना था। अब सोसायटियों पर मिलने वाला यूरिया उन किसानों के लिए ज्यादा उपयोगी साबित नहीं हो रहा। अब गेहूं को तीसरा पानी देना है।

यूरिया की रैक से यूरिया खाली करते हम्माल।

रेलवे स्टेशन पर गोदाम के बाहर रखी यूरिया कीे बोरी।

^ 2623 मी. टन यूरिया का एक रैक सोमवार को खाली कर आगर-शाजापु