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40 गांवों के 100 स्कूलों में पहुंचे अफसर, परखी शिक्षा की गुणवत्ता

5 वर्ष पहले
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टीएल मीटिंग स्थगित कलेक्टर ने अफसरों को गांव भेजा
जिले के शासकीय प्रावि व मावि स्कूलों की शिक्षा गुणवत्ता को सुधारने के लिए प्रशासनिक स्तर पर पहल शुरू हो गई। कलेक्टर अलका श्रीवास्तव ने सोमवार को टीएल बैठक कैंसिल करते हुए सभी अफसरों को स्कूलों की स्थिति जानने के लिए गांव भेज दिया। करीब 20 प्रशासनिक अधिकारियों शाजापुर जनपद क्षेत्र की 40 ग्राम पंचायतों के करीब 100 स्कूलों का औचक निरीक्षण किया। स्कूली बच्चों से चर्चा कर शिक्षा गुणवत्ता का आंकलन किया। सभी अफसर अब कलेक्टर को रिपोर्ट पेश करेंगे। इस दौरान जिस शिक्षक की लापरवाही सामने आएगी, उनके खिलाफ सीधे कार्रवाई की जाएगी।

ज्ञात रहे सरकारी स्कूलों की शिक्षा गुणवत्ता लगातार कम होती जा रही है। इस कारण आमजनों का सरकारी शिक्षा से विश्वास भी कम होने लगा। कमजोर वर्ग के लोग भी अपने बच्चों को मजबूरन निजी स्कूलों में एडमिशन दिलाने लगे। नतीजतन सरकारी स्कूलों में बच्चों की संख्या भी लगातार कम होने लगी। स्थिति ये रही कि इस बार 20 से कम छात्र संख्या वाले 90 स्कूलों को बंद करना पड़ा। सरकारी स्कूलों की इसी बिगड़ी व्यवस्था को सुधारने के लिए अब जिला प्रशासन ने आगे कदम बढ़ाया है। अब प्रशासनिक अफसरों की देखरेख में स्कूल संचालित होंगे।

अफसरों को स्कूल गोद देंगे- सरकारी स्कूलों में बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए अब कलेक्टर ने अधिकारियों को स्कूल गोद दिलाने का मन बनाया है। गोद लेने के बाद संबंधित अधिकारी को समय-समय पर स्कूल का निरीक्षण कर वहां की शिक्षा गुणवत्ता में सुधार कराना होगा।

सरकारी स्कूल ज्यादा बच्चे कम, निजी स्कूलों में ज्यादा बच्चे- कम छात्र संख्या वाले स्कूलों को बंद करने के बाद अब जिले में कुल शासकीय प्रावि स्कूल 808 और मावि 438 हैं। प्रावि और मावि के कुल 1246 स्कूलों में कुल 67 हजार 349 बच्चे हैं। जबकि निजी स्कूलों के आंकड़े पर नजर डालें तो जिले में प्रावि और मावि मिलाकर कुल 554 निजी स्कूल संचालित हो रहे हैं। इन स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या 1 लाख 10 हजार से ज्यादा है। जो सरकारी स्कूलों से लगभग दोगुनी है।

शिक्षा गुणवत्ता पर लगातार लगने वाले प्रश्न चिह्नों को ध्यान में रखते हुए शिक्षकों को आत्म मंथन करने की जरूरत है। राजनीति और आपसी विवाद छोड़ शिक्षा गुणवत्ता सुधारने पर ध्यान देने की जरूरत है। ऐसा नहीं हुआ तो आने वाले समय में स्कूलाें की हालत और बदतर हो जाएगी।

अफसरों ने यह जांचा
छात्र संख्या और उपस्थिति का सत्यापन।

शिक्षकों की उपस्थिति, शिक्षण का तरीका।

बच्चों से सामान्य चर्चा कर शिक्षा स्तर को आंकना

अनुपस्थित शिक्षकों और लापरवाही को दर्ज कर रिपोर्ट तैयार करना आदि।

प्रावि निछमा में जानकारी लेते नायब तहसीलदार पौराणिक।

इसलिए बिगड़ी सरकारी स्कूलों की छवि
शासकीय स्कूल के शिक्षकों में ज्यादातर शिक्षक शिक्षण कार्य के बजाय राजनीति में लगे रहते हैं। एक के बाद एक नए-नए संगठन बनाकर वे तनख्वाह बढ़वाने के लिए आए दिन हड़ताल पर चले जाते हैं। इधर, स्कूल संचालन के दौरान भी ज्यादातर शिक्षक बच्चों को ठीक से नहीं पढ़ाते। परिणामस्वरूप कक्षा 5वीं तक के बच्चों को हिंदी वर्णमाला तक नहीं सिखाई जाती। कक्षा 8वीं तक के छात्रों की अंग्रेजी और गणित दोनों कमजोर होते हैं। बचा समय बच्चों को मध्याह्न भोजन कराने में चला जाता है।

बच्चों में शिक्षा का स्तर काफी कमजोर है
गांव सतगांव और नारायणगांव के 4 स्कूल और दो आंगनवाड़ी के साथ सतगांव के उपस्वास्थ्य केंद्र का निरीक्षण किया। उपस्वास्थ्य केंद्र तो बंद मिला। रही बात स्कूलों की तो कक्षा एक से 8 तक के ज्यादातर बच्चों को किताब पढ़ना तक नहीं आता है। उनकी शिक्षा काफी कमजोर है। संबंधित शिक्षकों को सुधार के निर्देश भी दिए हैं। मीनाक्षी सिंह, एडीएम शाजापुर

शिक्षा गुणवत्ता पर पूरा फोकस रहेगा

शासकीय स्कूलों की शिक्षा गुणवत्ता में सुधारा कराने पर पूरा फोकस रहेगा। प्रशासनिक अधिकारियों को स्कूल गोद देकर उनमें सुधार कराया जाएगा। लापरवाही करने वाले शिक्षकों पर सीधे कार्रवाई की जाएगी। अलका श्रीवास्तव, कलेक्टर

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