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सरकारी अस्पताल में मरीजों को खराब दूध दिया

7 वर्ष पहले
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जिला अस्पताल में भर्ती मरीजों को प्रबंधन ने सोमवार को खराब दूध बांट दिया। मरीजों के परिजनों ने जैसे ही दूध को गर्म करने का प्रयास किया, दूध फट गया। एक के बाद एक सांची की करीब 8-10 थैलियों को गर्म किया, लेकिन सभी का दूध गर्म करते ही फट गया। यह सूचना अंदर वार्ड में पहुंची और सभी मरीजों ने प्रबंधन द्वारा दी गई दूध की थैली नाली में फेंक दी।

सोमवार दोपहर करीब 12.30 बजे मरीजों को खराब दूध मिलने के मामले में हंगामा हो गया। परिजनों ने प्रबंधन द्वारा दिए गए खराब दूध पर ऐतराज जताया और उन्हें दी गई थैली नाली में फेंक दी। इधर, इतना होने के बाद भी अस्पताल प्रबंधन का कोई भी कर्मचारी वहां नहीं पहुंचा। खराब दूध फेंक देने के बाद उन्हें दूसरी थैली भी नहीं मिली और मरीजों के परिजनों को बाजार से दूध खरीदकर लाना पड़ा।

सिविलसर्जन का निजी दवाखाने पर ज्यादा ध्यान - जिलाअस्पताल की व्यवस्था संभालने के लिए फिलहाल सिविल सर्जन बने बैठे डॉ. बी.एस. मैना को अस्पताल की गतिविधियों से कोई लेना-देना नहीं है। अस्पताल में मरीज परेशान हो इससे भी उन्हें कोई सरोकार नहीं। यही वजह है कि सोमवार को खराब दूध के मामले को भी उन्होंने गंभीरता से नहीं लिया। डॉ. साहब को सरकारी अस्पताल से ज्यादा अपने घर पर चल रहे निजी दवाखाने की चिंता ज्यादा रहती है। अस्पताल में उपस्थिति दर्ज कराते ही वे अपने घर संचालित हो रहे निजी दवाखाने पर पहुंच जाते हैं।

^दूध के खराब होने की जानकारी मिली है। मामले को गंभीरता से लिया जाएगा। रही बात सिविल सर्जन के ध्यान नहीं देने का तो इसकी भी जांच कराई जाएगी। डॉ.अनुसुइया गवली, सीएमएचओ,शाजापुर

गर्म करते ही फट गया दूध

^परिवारकी महिला जच्चा वार्ड में भर्ती है। सोमवार को जो दूध की थैली मिली। उसका दूध गर्म करते ही फट गया। ईश्वरसिंह,निवासीखुटपाला

कई थैलियों का दूध खराब

^प|ीभर्ती है। सुबह अस्पताल प्रबंधन द्वारा जो दूध की थैली दी गई। वह खराब निकली और दूध गर्म कराते ही फट गया। करीब आधा दर्जन से ज्यादा थैलियों का दूध खराब हुआ है। सचिनयादव, शाजापुर

नालियों में फेंक दी दूध की थैली।

गर्म करते ही ऐसे फटा पैकिंग थैली का दूध।