सरपंच-सचिव, ग्रामसेवक, मनरेगा और टीएससी कर्मचारियों पर रिश्वत का आरोप
ग्रामीणों ने कहा शासन की हर योजना का लाभ बगैर रुपए दिए नहीं मिलता
भास्कर संवाददाता | शाजापुर
जनपद पंचायत में चल रहे भ्रष्टाचार का मुद्दा शांत ही नहीं हुआ कि गुरुवार को ग्राम पंचायत जरखी के ग्राम सकराई के लोगों ने फिर रिश्वत की शिकायत कर दी। ग्रामीणों ने स्पष्ट शब्दों में कलेक्टर राजीव शर्मा से लेकर जिपं व जपं सीईओ को कह दिया कि शासन की कोई भी योजना हो, बगैर रिश्वत दिए ग्रामीणों को लाभ नहीं मिलता। मुख्यमंत्री आवास योजना से लेकर शौचालय निर्माण व अन्य योजनाओं के लिए सरपंच प्रतिनिधि, सचिव, ग्रामसेवक, मनरेगा और टीएससी के कर्मचारी रुपए लेते हैं। रुपए नहीं देने पर काम अटका देते हैं।
ग्रामीणों ने कलेक्टर को बताया कि पंचायत की सरपंच नौशा बी हैं लेकिन सरपंच पति गफ्फार शाह ही पूरा काम देख रहे हैं। शासकीय कागजों पर हस्ताक्षर से लेकर योजनाओं का लाभ किसे और कब मिलना है, यह सब वे ही तय करते हैं। कलेक्टोरेट पहुंचे हकीम खां, इब्राहिम खां, जाकीर शाह, प्रहलाद मालवीय, गोवर्धन मालवीय सहित दर्जनों ग्रामीणों ने बताया कि करीब 6 माह पहले प्रावि सकराई में लगने वाले पंचायत भवन का सारा सामान (कम्प्यूटर सहित) सरपंच पति अपने घर ले आए और वहां ताला लगा दिया। इससे ग्रामीणों को परेशान होना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने जिपं सीईओ सुदेश मालवीय और जपं सीईओ जितेंद्रसिंह सेंगर को भी लिखित आवेदन देकर इसकी शिकायत की है। जनपद पंचायत में जप अध्यक्ष प्रतिनिधि भेरूलाल सौराष्ट्रीय व उपाध्यक्ष बालाराम गुर्जर ने भी जपं सीईओ के सामने ग्रामीणों की बात रखी। गांव के शेख रफीक, रज्जाक खां, मो. इमरान, शेख सलीम सहित करीब 30-40 ग्रामीण मौजूद थे।
मुख्यमंत्री आवास के लिए तीन को देना पड़ रही रिश्वत
गांव के अब्बास पिता इकबाल अली ने बताया मुख्यमंत्री आवास के लिए दो हजार रुपए पंचायत सचिव को दिए। इसके बाद ग्राम सहायक व एक अन्य कर्मचारी को भी किश्तों में दो से तीन बार 500-500 रुपए दे चुका हूं। अंतिम किश्त चुकाने से पहले एक अन्य साहब जिन्हें हम सिर्फ चंदेल साहब के नाम से जानते हैं, उन्होंने भी 3000 रुपए लिए हैं।
जनपद अध्यक्ष प्रतिनिधि व उपाध्यक्ष को समस्या सुनाते ग्रामीण।