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फाइलों में दबा शामगढ़-हरदा रेल प्रोजेक्ट

5 वर्ष पहले
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भास्कर ने खोजा 40 साल पहले शहर को राजस्थान-महाराष्ट्र से जोड़ने के लिए तैयार प्लान का नक्शा
उदासीनता
भास्कर संवाददाता | शाजापुर/सुंदरसी

शाजापुर को राजस्थान से सीधे महाराष्ट्र को जोड़ने के लिए करीब 40 साल पहले शामगढ़-हरदा रेलमार्ग का प्लान बना। बात दिल्ली तक पहुंची और तत्कालीन सांसद भागीरथ मालवीय ने तत्कालीन रेल मंत्री के सामने प्रस्ताव रखा। बाकायदा 335 किमी रेल मार्ग का प्लान भी बना और 31 मई 1980 को तत्कालीन रेलमंत्री ने जिलेवासियों को चिट्‌ठी लिखकर उक्त रेल मार्ग बनाने का भरोसा दिलाया। लेकिन जनप्रतिनिधियों के बदलते ही प्रोजेक्ट फाइलों में दबकर रह गया। इसके बाद कई नेता आए और आकर चले गए। लेकिन उक्त रेलमार्ग पर किसी ने ध्यान देना उचित नहीं समझा।

ज्ञात रहे रेलमार्ग के मामले में शाजापुर काफी पिछड़ा है। गुना रेल लाइन निकली जरूर है, लेकिन उक्त मार्ग पर गिनी-चुनी ट्रेनें होने के कारण इसका फायदा न के बराबर मिलता है। ऐसे में रेल यात्रा लिए जिला मुख्यालय के लोगों को मक्सी और बेरछा का रुख करना पड़ता है। यदि शहर सीधे भोपाल-उज्जैन रेल लाइन से जुड़ जाए तो शहर के विकास को नई गति मिल जाएगी। उक्त रेल लाइन से शाजापुर, आगर, देवास और सीहोर चार जिले के लोगों को फायदा मिलेगा और वे सीधे राजस्थान व महाराष्ट्र के संपर्क में आ जाएंगे। इससे क्षेत्र में विकास की बढ़ने की भी काफी संभावनाएं हैं। उक्त मार्ग के लिए तीनों जिले के जनप्रतिनिधियों व आमजनों को आगे आने की जरूरत है।

10 साल आगे हो जाता शहर- तत्कालीन जनप्रतिनिधियों की मांग के अनुरूप यदि शामगढ़-हरदा रेलमार्ग डल जाता तो शाजापुर बड़े रेल जंक्शन बन जाता। इंदौर-उज्जैन और गुना लाइन से जुड़े शाजापुर में नई लाइन से सीधे भोपाल लाइन की कनेक्टिविटी हो जाती। उक्त लाइन से शाजापुर महाराष्ट्र और राजस्थान तक जुड़ जाता। इससे विकास की कई संभावनाएं सामने आ जाती और आज शहर वर्तमान स्थिति से करीब 10 साल आगे तक का विकास कर लेता।







सांसद को ध्यान देने की जरूरत- देवास-शाजापुर संसदीय क्षेत्र से चुनाव जीतकर सांसद बने मनोहर ऊंटवाल को इस ओर ध्यान देने की जरूरत है। लेकिन शायद उनको को न क्षेत्रवासियों से मतलब है और न यहां की समस्याओं को निपटाने और विकास कराने में दिलचस्पी। यही वजह है कि उन्होंने क्षेत्र विकास के लिए आज तक पहल शुरू नहीं की। जीत के बाद से ही वे क्षेत्र से भी गायब हो गए। इतना ही नहीं, सांसद को मोबाइल रिसीव करने की फुर्सत भी नहीं है।



क्षेत्र की समस्याओं को लेकर उन्हें जब भी मोबाइल लगाया जाता है वे रिसीव करना उचित नहीं समझते। लेकिन उक्त रेल मामले में अब उन्हें आगे आने की जरूरत है।

40 साल पहले तैयार किए शामगढ़-हरदा लाइन का प्रस्तावित नक्शा।

यहां से निकलना

थी रेल लाइन
प्रस्ताव राजस्थान के शामगढ़ से रेलमार्ग डालकर सीधे शाजापुर को जोड़ते हुए हरदा तक पहुंचाया गया था। शामगढ़ से सोयतकलां, सुसनेर, आमला, आगर, कानड़, दुपाड़ा, शाजापुर, बेरछा, पोलायकलां, अवंतिपुर बड़ोदिया, मैना होते हुए आष्टा, नेमावर से निकलते हुए सीधे हरदा पहुंचा था।

उक्त रेलमार्ग के प्रस्ताव की फिलहाल मुझे जानकारी नहीं है। यदि शामगढ़ से शाजापुर को जोड़ते हुए रेलमार्ग सीधे हरदा तक निकलता है तो निश्चित तौर पर शाजापुर, आगर जिले सहित देवास जिले के लाखों लोगों को इसका फायदा मिलेगा। मामले में जल्द ही सांसद मनोहर ऊंटवाल से चर्चा करेंगे और पूर्व सांसद भागीरथ मालवीय द्वारा शुरू की गई पहल को आगे बढ़ाकर रेल लाइन के प्रस्ताव को मंजूरी दिलाने का प्रयास करेंगे। अरुण भीमावद, विधायक शाजापुर

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