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दो साल से नहीं हो रहे प्लॉट के नामांतरण, खरीद-बिक्री प्रभावित
{चंबल संभागायुक्त के एक आदेश के चलते नहीं हो पा रहा है भूखंडों का नामांतरण।
{रोक के कारण हजारों लोगों को असुविधा होने के साथ ही शासन को भी राजस्व आय की हानि।
भास्करसंवाददाता|श्योपुर
श्योपुरमें रजिस्ट्री कराकर खरीदे गए भूखंडोंं के नामांतरण पर दो साल से रोक के चलते खरीद-बिक्री प्रभावित हो रही है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा अंतिम निराकरण के बावजूद भी श्योपुर में अभी तक रोक हटाई नहीं जा सकी है। इसकी वजह चंबल संभागायुक्त का एक आदेश है। जिले में रोक के चलते एक हजार से ज्यादा रजिस्ट्री पर खरीदे गए प्लाट के नामांतरण अटके हुए हैं।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा 7 जुलाई 2014 को इस मामले का अंतिम निराकरण कर दिए जाने के बाद प्रदेश के सभी जिलों में प्लाट की रजिस्ट्री तथा उनके आधार पर खरीदे गए प्लाट का राजस्व अभिलेख में नामांतरण हो रहे हैं। लेकिन चंबल संभाग और खासकर श्योपुर जिले में अभी तक प्लाट के नामांतरण पर रोक बरकरार है।
कमिश्रर का आदेश बना रोड़ा
रजिस्टर्डप्लाट के नामांतरण में चंबल संभाग के कमिश्रर द्वारा 23 मार्च 2013 को जारी आदेश रोड़ा बना हुआ है। इस आदेश के कारण सुप्रीमकोर्ट द्वारा अंतिम निराकरण के बाद भी श्योपुर में अभी भी स्थिति साफ नहीं हो पाई है। कमिश्रर द्वारा जारी इस आदेश में कहा गया था कि नामांतरण की प्रक्रिया बंद रखी जाए। जबकि इस आदेश के बाद सुप्रीमकोर्ट ने रोक हटा दी है। लेकिन कमिश्रर द्वारा नए सिरे से स्थिति साफ करने के लिए कोई आदेश जारी नहीं किया गया है।
कईबार उठा चुका है मामला
जिलेमें प्लाट के नामांतरण पर रोक को लेकर भाजपा नेताओं में भी नाराजगी है। यह मामला कलेक्टर धनंजय सिंह भदौरिया से लेकर प्रभारी मंत्री लाल सिंह आर्य के सामने भी कई बार उठाया जा चुका है। यह मुद्दा बुधवार को पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस में वरिष्ठ भाजपा नेता एवं गौपालन बोर्ड के पूर्व सदस्य कैलाशनारायण गुप्ता ने प्रमुखता से उठाया। सूत्रों का कहना है कि मंत्री ने इस मामले मेें चंबल कमिश्रर एवं प्रमुख सचिव राजस्व से चर्चा कर नामांतरण पर रोक हटवाने की बात कही है।
मामला कई बार अफसरों के सामने उठाया
^जिलेमें नामांतरण पर लगी रोक से प्लाट क्रय विक्रय प्रभावित हो रहा है। यह मामला कई बार हमने अफसरों के सामने उठाया है। प्रभारी मंत्री लाल सिंह आर्य ने इस मामले का जल्द हल निकालने का आश्वासन हमें दिया