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संचार टेक्नोलॉजी से लापता बच्चाें पर रखी जाएगी नजर
जिलेमेें पिछले पांच साल से करीब दो सैकड़ा बच्चे लापता हैं। इन लापता बच्चों को परिवार से मिलाने के लिए पुलिस अब मिसिंग चाइल्ड ट्रेकिंग सिस्टम का सहारा लेने की तैयारी में है। जिले के सभी गुमशुदा बच्चों का डाटा नेशनल पोर्टल पर फीड होगा।
गुमशुदा बच्चों को उनके घर तक पहुंचाने के मकसद ने मध्यप्रदेश पुलिस ने संचार टेक्नोलॉजी का सहारा लेते हुए मिसिंग चाइल्ड ट्रेकिंग सिस्टम इजाद किया है। श्योपुर में मिसिंग चाइल्ड ट्रेकिंग सिस्टम के नेशनल पोर्टल पर गुमशुदा बच्चों का डाटा फीड करने का काम शुरू कर दिया गया है। मानव तस्करी को रोकने के लिए भी इस पोर्टल की मदद ली जाएगी।
पुलिसकर्मियोंको जल्द मिलेगी ट्रेनिंग: मिसिंगचाइल्ड ट्रेकिंग सिस्टम के तहत पुलिसकर्मियों को ट्रेनिंग दी जाएगी। इस ट्रेनिंग के जरिए पुलिसकर्मियों को कम्प्यूटर डाटा एवं वेबसाइट के जरिए गुमशुदा बच्चों की पोर्टल पर ऑनलाइन जानकारी दर्ज करने का तरीका बताया जाएगा।
श्योपुर. पुलिसअधीक्षक कार्यालय। (फाइल फोटो)
पुलिसकर्मियों को जल्द ट्रेनिंग दी जाएगी
^मिसिंगचाइल्ड ट्रेकिंग सिस्टम के तहत एक पोर्टल बनाया गया है। लापता बच्चों पर नजर रखने के लिए यह पोर्टल समर्पित है। इसकी मदद से लापता बच्चों को उनके परिवार से मिलाया जाएगा। पोर्टल पर डाटा दर्ज करने के लिए पुलिसकर्मियों को जल्द ही ट्रेनिंग दी जाएगी। एमएलछारी,एसपी, श्योपुर
यह है सिस्टम
मिसिंगचाइल्ड ट्रेकिंग सिस्टम का इस्तेमाल सबसे पहले दिल्ली पुलिस ने किया। दिल्ली में इस सिस्टम को दो साल पहले अमल में लाया गया था। इसके जरिए गुमशुदा बच्चों को तलाशने में पुलिस को खासी मदद मिली। अब इससे मप्र में भी शीघ्र ही लागू करने की तैयारी है।
जिलेमें पांच साल में 198 बच्चे लापता
श्योपुरजिले में पिछले पांच साल के दौरान 198 बच्चों के लापता होने पर पुलिस ने गुमशुदगी दर्ज की है। गुमशुदा बच्चों के 70 प्रतिशत मामलों में पुलिस को कोई सफलता नहीं मिल पाई है। गुमशुदा बच्चों के मां बाप के लिए मिसिंग चाइल्ड ट्रेकिंग सिस्टम नई उम्मीद लेकर आया है।