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डॉक्टरों के चेंबर खाली, इलाज के लिए भटकते रहे मरीज
बुखार का प्रकोप और डॉक्टर ट्रेनिंग पर
{ इलाज मिलने से लोगों को प्राइवेट डॉक्टर्स के क्लीनिक पर कराना पड़ रहा इलाज।
भास्करसंवाददाता| श्योपुर
श्योपुरमें स्वास्थ्य सेवाओं की हालत बदहाल है। जिला अस्पताल में 22 डॉक्टर पदस्थ हैं इनमें से छह डॉक्टर सरकारी ट्रेनिंग कैंपों में व्यस्त हैं शेष डॉक्टर शनिवार को ओपीडी में चेंबर से गायब थे। डॉक्टर के नहीं होने से सुबह 10.30 बजे से एक बजे तक आठ सैकड़ा से अधिक मरीज इलाज के लिए पर्चे हाथों में लेकर इधर-उधर घूमते रहे लेकिन उन्हें इलाज नहीं मिला।
जिला अस्पताल की ओपीडी के काउंटर पर पहली शिफ्ट में सुबह 8 बजे से दोपहर 1 बजे तक लगभग 800 मरीजों के पर्चे बने। पर्चे बनाने के बाद कई मरीज और उनके अटेंडर अस्पताल की ओपीडी में भटकते नजर आए। इसलिए कि कई डॉक्टरों के कक्ष तो खुले थे लेकिन वे अपनी टेबल पर बैठे नहीं थे। वहीं छह डॉक्टरों के ट्रेनिंग और स्वास्थ्य शिविरों में ड्यूटी होने से उनके चेंबरों में ताले लटके थे। नतीजतन कई मरीजों को इलाज कराए बगैर ही अस्पताल से लौटना पड़ा।
जमीन पर लेटकर करा रहे इलाज
100पलंग वाले जिला अस्पताल में दो सौ से ज्यादा मरीज भर्ती हैं। शनिवार को नौबत यह बनी कि अस्पताल में मरीजों को जमीन पर लेटकर ही इलाज कराना पड़ा। कई मरीज तो जमीन पर बैठकर ही ड्रिप लगा रहे थे। मासूम बच्चों को भी अस्पताल में इलाज के लिए पलंग नसीब नहीं हो पाया। यह हालात पिछले दो सप्ताह से बने हैं।
डॉक्टर मिलते नहीं हैं, कहां कराएं इलाज
^मैंतो डॉ. विष्णु गर्ग को दिखाने के लिए दो दिन से अस्पताल रही हूं। डॉक्टर मिल ही नहीं रहे हैं। अब मुझे माधौपुर जाना पड़ेगा। श्यामाशर्मा, निवासीवार्ड क्रमांक 10
^गांवसे बच्चे को दिखाने के लिए आया हूं। लेकिन ओपीडी में बुखार का कोई डॉक्टर है ही नहीं। पूछने पर पता चला कि डॉक्टर को बाहर गए हैं। कन्हैयाजाट, निवासीराड़ेप
नदारद डॉक्टर से लूंगा स्पष्टीकरण
^डॉक्टरट्रेनिंग हेल्थ कैंप में हैं। ऐसे में अस्पताल की व्यवस्थाएं प्रभावित होना लाजमी है। अगर ओपीडी से ड््यूटी के समय डॉक्टर नदारद थे तो मैं उनसे स्पष्टीकरण लेता हूं। डॉ.एसके. तिवारी, सिविलसर्जन, जिला अस्पताल, श्योपुर
शहर ग्रामीण इलाकों में वायरल फीवर, मलेरिया, फेल्सीपेरम और डायरिया का प्रकोप जबरदस्त है। अस्पताल में रोजाना एक हजार मरीजों की ओपीडी हो रही