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सरकारी विभागों के वाहन पकड़े, किसी का बीमा खत्म कई ड्राइवरों पर नहीं थे लाइसेंस
कई अफसरों के वाहनों के चालान काटे
दुर्घटना हुई तो पीड़ित को कौन देगा क्लेम
शनिवारको सीजेएम ठाकुरदास ने अचानक शिवपुरी रोड स्थित सफेद चबूतरा पर मोबाइल कोर्ट लगाकर मोटर व्हीकल एक्ट का उल्लंघन करने वाले सैकड़ों वाहनों से जुर्माना वसूला। इस दौरान कोर्ट ने सिविल सर्जन डॉ. एस के तिवारी, महाप्रबंधक बिजली वितरण कंपनी जी के भरद्या, महाप्रबंधक पीएमजीएसवाय आर कौशिक और महिला बाल विकास विभाग के विजयपुर परियोजना अधिकारी की गाड़ी से भी जुर्माना वसूला।
उनमें से कई विभागों की गाड़ियों का बीमा खत्म हो चुका था तो कई वाहनों के ड्राइवर के पास लाइसेंस ही नहीं था। कार्रवाई के दौरान सीजेएम ठाकुरदास अपनी कार में बैठे रहे। जबकि कोतवाली टीआई मुनीष राजौरिया, ट्रैफिक टीआई एच एस तिवारी के साथ एक दर्जन से अधिक पुलिसकर्मियों ने वाहनों की धरपकड़ का काम संभाला।
नजरचूकते ही गाड़ियां ले भागे ड्राइवर
वाहनोंकी धरपकड़ के बीच कई बार ऐसा भी हुआ, जब पुलिसकर्मियों की नजर बचाकर कई वाहनों के ड्राइवर बिना जुर्माना वसूले ही वाहन निकालने में सफल हो गए। परियोजना अधिकारी महिला बाल विकास विजयपुर की कार का ड्राइवर तो कार को दौड़ा कर काफी दूर तक ले गया, जिसे बमुश्किल पुलिसकर्मियों ने पीछा कर पकड़ा। बाद में कागजात होने के कारण उसका चालान बनाया गया।
विभागों में अनुबंधित वाहनों के परमिट नहीं थे
मोबाइल कोर्ट की कार्रवाई के दौरान शनिवार को शहर में आधा सैकड़ा वाहनों के चालान काटे गए। इनमें आधा दर्जन अफसरों की गाड़ी भी शामिल हैं। अफसरों की गाड़ी में कमी यह पाई गई कि विभागों में अनुबंधित वाहन के मालिकों ने शासन से परमिट नहीं लिया था। इसलिए ट्रैपिक नियमों के उल्लंघन पर इन असफसरों की गाडिय़ों के चालान बनाने के बाद मौके पर ही मजिस्ट्रेट द्वारा जुर्माना वसूला गया। जिला यातायात प्रभारी एचएस तिवारी ने बताया कि नियमानुसार विभाग में अनुबंधित वाहन के मालिक को शासन से परमिट लेना पड़ता है। शनिवार को चैकिंग के दौरान अफसरों की गाड़ी के परिमिट नहीं पाए गए। उन्हें ट्रैफिक एक्ट 66/192 के तहत चालान कर मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया। मजिस्ट्रेट द्वारा मौके पर ही चालान जुर्माना वसूल किया गया। इसमें कितनी जुर्माना राशि वसूली गई है, इस बारे में मोबाइल कोर्ट ने जानकारी उपलब्ध नहीं कराई है।
मोबाइल कोर्ट द्वारा जो पकड़े गए जिन सरकारी