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माता-पिता निर्बल तो बेटों को करनी होगी देखभाल

7 वर्ष पहले
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विधिक सहायता शिविर में न्यायाधीश एनके सत्संगी ने कहा।

भास्करसंवाददाता| श्योपुर

जिलाएवं सत्र न्यायाधीश श्री एनके सत्संगी के मार्गदर्शन में श्री गणराज सेवा समिति द्वारा संचालित वृद्धाश्रम में विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन किया गया। इस दौरान न्यायाधीश एवं सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जेके बाजौलिया, जिला विधिक सहायता अधिकारी प्रदीप सिंह ठाकुर, वृद्धाश्रम के संचालक बालमुकुन्द शर्मा उपस्थित थे।

न्यायाधीश एवं सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जेके बाजौलिया ने शिविर के दौरान कहा कि वृद्धजनों को विभिन्न प्रकार के अधिकार कानून के माध्यम से दिए गए हैं। इन कानूनों की जानकारी सभी को होना चाहिए। उन्होंने कहा कि माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण एवं कल्याण अधिनियम 2007 का प्रावधान है, जिसमें वृद्ध माता-पिता के भरण-पोषण का दायित्व पुत्र-पुत्रियों का है। हिन्दू धर्म के वृद्ध माता-पिता के लिए हिन्दु दत्तक एवं भरण-पोषण अधिनियम 1956 की धारा 20 में यह प्रावधान है कि कोई हिन्दू अपने जीवन काल के दौरान अपने वृद्ध या निर्बल माता-पिता का भरण-पोषण करने के लिए बाध्य है।