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जिले में एक लाख 43 हजार हेक्टेयर में होगी रबी फसलों की बोवनी , तैयारी में जुटे किसान

7 वर्ष पहले
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खरीफ सीजन में पिट चुके किसानों को अब रबी फसल से आस।

भास्करसंवाददाता| श्योपुर

पहलेबारिश में विलंब और बाद में अतिवृष्टि के कारण खरीफ सीजन मेंं पिट चुके किसानों ने रबी फसलों की बोवनी के लिए कमर कस ली है। कृषि विभाग ने जिले में एक लाख 43 हजार 200 हेक्टेयर रकबे में रबी फसलों की बोवनी का लक्ष्य तय किया है। इसमें सर्वाधिक 79 हजार हेक्टेयर में गेहूं तथा 48 हजार हेक्टेयर में सरसों की पैदावार का अनुमान है। अनियमित बारिश के चलते खेतों में खरीफ की मुख्य फसल सोयाबीन और तिली खराब होने के कारण इस बार रबी का रकबा गत वर्ष की तुलना में पांच हजार 100 हेक्टेयर बढ़ेगा। पिछले साल किसानों ने एक लाख 38 हजार 100 हेक्टेयर में रबी फसल की पैदावार की थी।

कृषि विभाग ने रबी सीजन के लिए जिले में 79 हजार हेक्टेयर में गेहूं , 48 हजार हेक्टेयर में सरसों और 15 हजार हेक्टेयर में चना की बोवनी होगी। इसके अलावा जौ 500, मटर 200, मसूर 100, अलसी 300 और गन्ना 100 हेक्टेयर में बोवनी का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

खाद और बीज का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है

^जिलेमें कुल एक लाख 43 हजार 200 हेक्टेयर में रबी फसलों की बोवनी का लक्ष्य रखा गया है। यह गत वर्ष की तुलना में पांच हजार 100 हेक्टेयर ज्यादा है। खरीफ की मुख्य फसल सोयाबीन और तिली खराब होने के कारण रबी के रकबा बढ़ा है। खाद और बीज का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है किसानों को बोवनी के लिए खाद-बीज की किल्लत आड़े नहीं आने दी जाएगी। एसकेमाहौर, उपसंचालक , कृषि विभाग श्योपुर।

खरीफ सीजन में पिट चुके किसानों को अब रबी से आस

जिलेमें मानसून की शुरुआती लेटलतीफी और बाद में अतिवृष्टि के कारण खरीफ सीजन में पिट चुके किसानों की उम्मीदें अब रबी फसलों पर टिकी हुई है। उल्लेखनीय है कि किसानों को चालू मानसून सीजन में एक के बाद एक तमाम विपरीत हालात का सामना करना पड़ा है। पहले तो मानसून 20 दिन देरी से सक्रिय हुआ जब बारिश हुई तो खाद और बीज की किल्लत ने किसानों को मुश्किल में डाल दिया। जैसे तैसे किसानों ने खाद-बीज का बंदोबस्त कर अपने खेतों में खरीफ की मुख्य फसल सोयाबीन और तिली की बोवनी की थी। लेकिन बाजार से खरीदकर बोया गया बीज खेतों में अंकुरित ही नहीं हुआ। पहले प्रयास में धोखा खाने के बाद किसानों को राजस्थान से बीज मंगाकर दोबारा बोवनी करनी पड़ी थी। जब फसलें 20 दिन की हुई तो