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अब कुपोषित बच्चों को घर पर मिलेगी खिचड़ी-दलिया
एक भी आंगनबाड़ी केन्द्र पर नहीं पहुंच रहा थर्ड मील
नौ माह बाद भी नहीं खोले गए डे-केयर सेंटर
कुपोषितबच्चों की जिंदगी बचाने के लिए जिलेभर में 40 डे-केयर सेंटर खोले जान थे। लेकिन करीब नौ माह गुजरने के बाद भी डे-केयर सेंटर नहीं खोले जा सके हैं। जबकि इनका संचालन इस साल 1 जनवरी से ही शुरू जाना चाहिए था। डे-केयर सेंटरों का संचालन एनजीओ को करना था। इसलिए लिए विभाग को 20 एनजीओ ने प्रस्ताव भी भेजे थे, लेकिन पूर्व कलेक्टर जीबी पाटिल ने इस मामले में पहल नहीं की।
जिलेभर में 1180 आंगनबाड़ी केन्द्र संचालित हो रहे हैं। इन केन्द्रों पर तकरीबन 3 हजार के आसपास कुपोषित और अति कुपोषित बच्चे दर्ज हैं। हैरानी की बात यह है कि एक भी आंगनबाड़ी केन्द्र पर कुपोषितों के लिए थर्ड मील नहीं पहुंच रहा है। ऐसे में कुपोषितों की सेहत में सुधार नहीं हो पा रहा है। शहरी क्षेत्र के मुकाबले ग्रामीण अंचल के कुपोषितों को तो थर्ड मील देना जरूरी है।
थर्ड मील में कुपोषितों को देना होता है पौष्टिक व्यंजन
एकीकृतबाल विकास सेवा विभाग की कुपोषितों बच्चों को थर्ड मील देने की महत्ती योजना है। इस योजना के तहत कुपोषितों को दोपहर 2 बजे के बाद पौष्टिक व्यंजन देने का प्रावधान है। जिसमें कुपोषितों को मीठी-नमकीन खिचड़ी, दलिया सहित अन्य पौष्टिक आहार दिया जाता है। पहले अंडा और दूध भी देना योजना में तय किया गया था। लेकिन बाद में सरकार ने ही अंडा देने से अपने हाथ फीकी योजना वापस ले ली थी।
शहर के वार्ड क्रमांक 13 मे आंगनबाड़ी केन्द्र पर बच्चों को प्राथमिक शिक्षा देती आंगनबाड़ी कार्यकर्ता (फाइल फोटो)।
लगभग 3000 कुपोषित हैं जिले में
> 180 आंगनबाड़ी केन्द्र हैं जिलेभर में।
> 6 एकीकृत बाल विकास सेवा विभाग की परियोजनाएं है जिले में।
> तकरीबन 3000 कुपोषित और अति कुपोषित बच्चे हैं जिलेभर में।
पन्ना जिले की योजना को श्योपुर में अमल कराया जाएगा
^हमने पन्ना जिले में थर्ड मील योजना के तहत कुपोषित बच्चों को घर-घर टिफिन में पोषण आहार भेजने की व्यवस्था लागू की थी। श्योपुर जिले में भी इस व्यवस्था को अमल में लाया जाएगा। इसके लिए हमने तैयारी शुरू कर दी है। जिले में अति कुपोषित बच्चों का वजन बढ़ाना पहल लक्ष्य है। धनंजयसिंह भदौरिया, कलेक्टर,श्योपुर
{ अति कुपोषित बच्चों को अब आंगनबाड़ी कार्यकर्ता टिफिन में पहुंचाएगी थर