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एक हजार टन खाद का दिया भरोसा ,मिला सिर्फ ४०० टन
खेतों को पानी मिलने के बाद रबी फसलों में खाद देना जरूरी।
भास्करसंवाददाता|श्योपुर
दोदिन तक जिले के अधिकांश हिस्सों में रुक-रुक कर हुई मावठ की बारिश ने खेतों को तरबतर कर दिया। खेतों को पानी मिलने के बाद रबी फसलों में खाद देना जरूरी है। बारिश के साथ खाद की मांग बढ़ गई है। लेकिन सहकारी संस्थाओं पर किसानों को पर्याप्त मात्रा में खाद नहीं मिल रहा है। रविवार को खाद के लिए आपाधापी मची रही। अवकाश के बावजूद सैकड़ोंं किसान सहकारी संस्थाओं पर चक्कर काटते रहे।
कई किसानों ने बताया कि सहकारी संस्थाओं पर एक किसान को यूरिया खाद के सिर्फ तीन बैग दिए गए हैं। जबकि एक हेक्टेयर में ही चार बैग डालना जरूरी है। किसानों का कहना है कि मावठ की बारिश ने सिंचाई का संकट तो दूर कर दिया है, लेकिन यूरिया खाद की किल्लत जस की तस बनी हुई है। फसलों को पानी मिलने के बाद यूरिया खाद देना जरूरी होता है। यदि दो दिन में यूरिया खाद नहीं मिला तो किसान कहीं के नहीं रहेंगे।
वहीं जिले में खाद की समस्या को लेकर भोपाल में भाजपा किसान मोर्चा के जिलाध्यक्ष राघवेंद्र सिंह राजावत एवं कराहल मंडल अध्यक्ष हरिओम भूषण ने कृषि मंत्री गौरीशंकर बिसेन को ज्ञापन दिया। जिसमें बताया कि मांग के मुताबिक किसानों को यूरिया खाद नहीं मिलने के कारण गेहंू की बोवनी पिछड़ती जा रही है। साथ ही सरसों की फसल बर्बाद हो रही है। उन्होंने धान उत्पादक किसानों की समस्या भी रखी। कृषि मंत्री को बताया गया कि श्योपुर मंडी में धान की खरीद होने के कारण जिले के किसानों को धान बेचने के लिए कोटा, बारां और बंूदी की मंडियों में जाना पड़ रहा है। कृषि मंत्री श्री बिसेन ने खाद की किल्लत शीघ्र दूर करने तथा धान की खरीदी शुरू कराने का आश्वासन किसान नेताओं को दिया है।
किसानोंको 2800 टन यूरिया की तत्काल जरूरत: गेहंूकी बोवनी और रबी फसलों के लिए किसानों को 2800 टन यूरिया खाद की तत्काल जरूरत है। इसमें 500 टन यूरिया सोमवार तक श्योपुर पहुंचने की बात मार्कफेड के अधिकारी कह रहे हैं। लेकिन मांग की तुलना में यह खाद ऊंट के मुंह में जीरे के समान है।
खाद के लिए ट्रक पर लगी किसानों की लाइन।
एक हजार के बजाय सिर्फ 400 टन यूरिया आया
मार्कफेडके अधिकारी एक हजार टन यूरिया खाद शनिवार तक आने का दावा कह रहे थे। लेकिन सिर्फ 400 टन खाद ही श्योपुर आया। सोयाइटियों पर यह खाद